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संसद में गतिरोध बरकरार, दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित

डेस्क:विपक्षी सदस्यों द्वारा लगातार व्यवधान उत्पन्न करने के कारण लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। इससे पहले, अध्यक्ष ओम बिरला ने नारेबाजी और तख्तियां प्रदर्शित करने के लिए सांसदों को फटकार लगाते हुए कहा कि बजट सत्र में अब तक सदन के कुल 19 घंटे और 13 मिनट बर्बाद हो चुके हैं। सदन सोमवार (9 फरवरी, 2026) को सुबह 11 बजे पुनः बैठेगा। बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा, जिसके बाद संसद 9 मार्च तक अवकाश पर रहेगी। इसी बीच राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच तीखी नोकझोक हुई। यह नोकझोक राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर थी, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। इससे पहले संसद परिसर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिट्टू को “गद्दार” कह दिया था, जिसके बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को अपने निर्धारित समय से करीब डेढ़ घंटा पहले ही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित करने का प्रस्ताव कांग्रेस की तरफ से आया जिसे सरकार ने मान लिया।

आज की कार्यवाही
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय रेल की वित्तीय स्थिति में काफी सुधार हुआ है और अब सभी खर्च पूरी करने के बाद कुछ राजस्व अधिशेष है। वैष्णव ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर में बताया कि 2014-24 के दौरान 5.04 लाख नौकरियां सृजित की गईं, जबकि वर्तमान सरकार के तीसरे कार्यकाल में 1.5 लाख और रोजगार प्रदान किये जा रहे हैं।

राज्यसभा में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी की सदस्य जया बच्चन ने विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों का मुद्दा उठाया और सरकार से मांग की कि देश में ऐसे बच्चों की संख्या को देखते हुए अनुकूल शिक्षा प्राप्त प्रशिक्षक तैयार किए जाएं। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए जया ने विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों के लिए प्रशिक्षित लोगों की कमी रेखांकित की।

राज्यसभा में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि ने सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए 60 साल से अधिक उम्र के उनके बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल हेतु 45 दिन की अनिवार्य छुट्टी की मांग की।

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