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संसद में घमासान: नियम 349 और पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब पर क्यों छिड़ा विवाद

डेस्क:संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण (Memoir) का हवाला देने की कोशिश की। सत्ता पक्ष के कड़ा विरोध करने और नियम 349 (Rule 349) का हवाला दिए जाने के बाद राहुल गांधी को बोलने से रोक दिया गया। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जैसे ही पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) का जिक्र किया, सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। राहुल गांधी डोकलाम और गलवान में भारत-चीन सीमा गतिरोध पर सरकार को घेरना चाहते थे, लेकिन उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। नियम 349 (Rule 349) क्या है?
संसद की कार्यवाही और सदस्यों के आचरण को सुचारू रूप से चलाने के लिए नियम 349 बनाया गया है। इसके खंड (i) के अनुसार: “कोई भी सदस्य सदन में ऐसी कोई किताब, समाचार पत्र या पत्र नहीं पढ़ेगा, जिसका संबंध सदन की वर्तमान कार्यसूची (Business of the House) से न हो।” विवाद का कारण: हालांकि नियम 349 में ‘प्रकाशित’ या ‘अप्रकाशित’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला ने व्यवस्था दी कि किसी भी ऐसी सामग्री को तब तक कोट नहीं किया जा सकता जब तक उसे सदन के पटल पर प्रमाणित (Authenticate) करके न रखा जाए।

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