डेस्क:मोदी सरकार का आम बजट साफ राजनीतिक संदेश देता है कि सत्ता अब तात्कालिक लोकलुभावन राहत से हटकर उद्योग और उत्पादन बढ़ाने पर दांव लगा रही है। पिछले साल वेतनभोगी वर्ग को साधा गया था, इस बार ध्यान कारखानों, निर्यात और निर्माण पर है। महंगाई और रोजमर्रा के खर्च से जूझ रहे मध्यम वर्ग को तुरंत राहत कम दिखेगी, पर सरकार यह जताना चाहती है कि मजबूत उद्योग ही आगे चलकर रोजगार और आय बढ़ाएंगे। यानी यह बजट वोट से ज्यादा विकास की कहानी गढ़ने की कोशिश भी है और आर्थिक दिशा बदलने का संकेत भी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ संकेत दिया है कि तुरंत उपभोक्ता राहत से ज्यादा जोर दीर्घकालिक औद्योगिक मजबूती पर रहेगा, वह भी ऐसे समय में जब दुनिया भर में व्यापारिक अनिश्चितता मंडरा रही है। अर्थशास्त्री इसे उत्पादक केंद्रित बजट बता रहे हैं और मानते हैं कि इससे देश में निर्माण को बल मिलेगा। मध्यम वर्ग को कागज पर यह बजट फीका लग सकता है, पर विशेषज्ञों का तर्क है कि परोक्ष लाभ, प्रत्यक्ष लाभ से ज्यादा होंगे।
