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भैया सेवानिवृत्त हो ही नहीं सकते : प्रो. झा

ईश्वर अनिल जी को दीर्घायु रखें : वीसी

कुलसचिव ने कर्मचारियों के लिए बताया अनुकरणीय

संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रशाखा पदाधिकारी की सेवानिवृत्ति पर विदाई समारोह

दरभंगा। संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रशाखा पदाधिकारी एवं विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के निवर्तमान अध्यक्ष विद्यावाचस्पति उपाधि प्राप्त डॉ अनिल कुमार झा आज सेवानिवृत्त हो गए। मौके पर दरबार हॉल में आयोजित विदाई समारोह को सम्बोधित करते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय जयपुर कैम्पस के वरीय प्राध्यापक प्रो. बोध कुमार झा ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति प्रो.लक्ष्मी निवास पांडेय का विचार व स्वभाव सेवानिवृत्त हो रहे डॉ अनिल कुमार झा से पूरी तरह मेल खाता है। जिस तरह कुलपति प्रो पांडेय ने अपने सभी भाई बहनों को पढ़ाया लिखाया व काबिल बना दिया , ठीक वैसे ही हमारे अनिल भैया का योगदान रहा है। उन्होंने कहा, ” वे आज जो भी हैं, जैसा भी हैं, सभी उन्हीं के बदौलत सम्भव हुआ है। मैं गर्व व गौरव महसूस कर रहा हूँ कि मेरे सामर्थ्य का आधार भी भैया ही हैं। शास्त्र व शिक्षा के प्रति उनका लगाव ऐसा है कि वे सेवानिवृत्त हो ही नहीं सकते हैं।” उन्होंने आशा व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विकास व शास्त्र शिक्षा के लिए वे पहले की तरह सदा अपनी सेवा देते रहेंगे। वहीं, कुलपति प्रो. पांडेय ने प्रशाखा पदाधिकारी डॉ झा की कार्य क्षमता व कार्य संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें लम्बी उम्र दे। कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें डॉ अनिल जी के साथ काम करने का ज्यादा मौका नही मिला है लेकिन अल्प अवधि में देखा कि उनके कार्य करने का तौर तरीका बेहद ही अच्छा है। वे हमेशा हंसमुख रह कर कार्य करते थे।सभी कर्मचारियों को उनका अनुकरण करना चाहिए। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने कहा कि डॉ झा को
कर्मचारियों एवं विश्वविद्यालय की ओर से भावभीनी विदाई दी गयी। उन्हें पाग-चादर व फूल माला से दर्जन भर लोगों ने बारी बारी से सम्मानित किया। डीन प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने उन्हें भगवान जगन्नाथ पुरी की तैलीय तस्वीर भेंट की।
इसी क्रम में धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष व शोध प्रभारी डॉ दिलीप कुमार झा ने उन्हें बंदनीय व अनुकरणीय गुरु तुल्य बताया। उन्होंने कहा कि इनके आशीर्वाद से पूरे परिवार व शुभचिंतकों में चार जेआरएफ व 11 नेट उत्तीर्ण हैं। इनके सौ से अधिक शिष्य बढ़े बढ़े ओहदे को सुशोभित कर रहे हैं। वहीं प्रो0 श्रीपति त्रिपाठी ने डॉ झा के स्वभाव एवं उनके परिवार से पुराने सम्बन्ध की चर्चा करते हुए उनके लंबे दीर्घायु जीवन की कामना की। प्रो0 त्रिपाठी, विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रघुनन्दन लाल कर्ण, सेवानिवृत पीटीआई व प्रखर सीनेट सदस्य मदन प्रसाद राय, प्रॉक्टर डॉ कुणाल कुमार झा , प्राचार्य डॉ शिवलोचन झा ने डॉ झा को सेवानिवृति के अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा पीपीओ नहीं दिए जाने पर चिंता जाहिर की और पुरानी परंपरा को बहाल रखने की मांग की। मौके पर सेवानिवृत्त हो रहे डॉ झा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि विश्वविद्यालय में वे बेदाग अपनी सेवा समाप्त कर रहे हैं। संस्कृत के विकास व समृद्धि के लिए उनसे जो बन पाएगा वह आगे भी करते रहेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन व सभी कर्मियों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम को डॉ दयानाथ झा, एफओ डॉ पवन कुमार झा, डीन पुरेन्द्र वारिक, प्रधानाचार्य डॉ निरंजन मिश्र, सीनेट सदस्य अंजीत चौधरी ने भी सम्बोधित किया। डॉ झा के शिक्षक पुत्र डॉ दीपक कुमार झा ने भी उन्हें आदर्श पिता बताया। कार्यक्रम का संचालन कर्मचारी नेता डॉ रविन्द्र कुमार मिश्र ने किया। पूर्व कुलपति व ज्योतिषाचार्य डॉ शिवाकांत झा, राजकीय महाविद्यालय जयपुर के प्रधानाचार्य डॉ देवकुमार झा, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ रामकुमार चौधरी विशेष रूप से उपस्थित थे। इसके अलावा सभी पदाधिकारी व कर्मी के साथ साथ डॉ झा के परिवार के दभी सदस्य सीनेट हॉल में उपस्थित रहे।

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