डेस्क:गहरी बर्फ, कटीली ढलानें और मौत से सटा सन्नाटा। यही वह मंजर था जिसमें जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के दूरदराज गुंडना इलाके के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया जो अक्सर सरकारी तंत्र और आधुनिक साधनों से भी नहीं हो पाता। हम आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन ग्रामीणों ने लगभग पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर करीब ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर फंसे बीस से अधिक सेना के जवानों की जान बचाई। यह कोई औपचारिक अभियान नहीं था, न कोई तमगा पाने की चाह। यह इंसानियत और जिम्मेदारी की सीधी लड़ाई थी, जिसे इन पहाड़ी लोगों ने जीत लिया।भारी बर्फबारी के कारण डोडा और किश्तवाड़ जिलों की सीमा के पास मोरचा टॉप पूरी तरह सफेद कब्र में बदल गया था। पांच से छह फीट मोटी बर्फ ने हर रास्ता बंद कर दिया था। हम आपको बता दें कि सेना के जवान आतंक विरोधी तलाशी अभियान ऑपरेशन त्राशी एक के तहत इलाके में तैनात थे। यह अभियान घने जंगलों में पिछले करीब दो हफ्तों से चल रहा था। मौसम ने अचानक करवट बदली और तेज बर्फबारी ने जवानों को वहीं जकड़ लिया। संपर्क सीमित था, आवाजाही नामुमकिन और खतरा हर सांस में मौजूद था।
