डेस्क:महाराष्ट्र के राजनीतिक क्षितिज पर ‘अजीत दादा’ एक ऐसे ध्रुव थे, जिनके इर्द-गिर्द सत्ता के समीकरण घूमते थे। बुधवार को बारामती में हुए विमान हादसे ने न केवल एक प्रभावशाली जीवन का अंत किया, बल्कि राज्य की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ से भविष्य की राह धुंधली नजर आती है। अजीत पवार के पास वर्तमान में उपमुख्यमंत्री का पद था और उनकी पार्टी (NCP) महायुति सरकार की एक प्रमुख सहयोगी है। 41 विधायकों और आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ के साथ, उनकी पार्टी सत्ता में एक मजबूत स्थिति में है। उनकी मृत्यु के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि: नया उपमुख्यमंत्री कौन बनेगा? क्या पार्टी के भीतर से प्रफुल्ल पटेल या सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेता यह जिम्मेदारी संभालेंगे, या कोई नया चेहरा सामने आएगा? क्या अजीत दादा के बिना यह 41 विधायक एक साथ बने रहेंगे, या सत्ता के नए केंद्रों की तलाश में पार्टी में फिर से बिखराव होगा
