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दुनिया में उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के क्या हाल हैं? रिपोर्ट में बड़ा संकेत

डेस्क: दुनिया भर में ट्रेड वॉर, ऊंचे टैरिफ और जियोपॉलिटिकल तनाव ने बाजारों को बेचैन कर रखा है। हर दिन नए डर और नई अनिश्चितता सामने आ रही है। इसके बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढहती नजर नहीं आ रही। HDFC म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट बताती है कि तमाम झटकों के बीच भी ग्रोथ की सांस अभी चल रही है।

वैश्विक ग्रोथ को सरकारों और टेक ने थामा

रिपोर्ट के मुताबिक विकसित देशों में भारी सरकारी खर्च और टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश ने वैश्विक ग्रोथ को सहारा दिया है। इसी वजह से 2026 और उसके बाद भी दुनिया की अर्थव्यवस्था टिके रहने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। घाटे बढ़ रहे हैं और इसी कारण कई देशों में बॉन्ड यील्ड ऊपर चढ़ती जा रही हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर सबको चौंकाया है। GDP ग्रोथ उम्मीद से बेहतर रही है और टेक सेक्टर इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। लेकिन तस्वीर का दूसरा हिस्सा उतना मजबूत नहीं है। रोजगार की रफ्तार थमी हुई है और यह ग्रोथ के साथ कदम नहीं मिला पा रही। इसके बावजूद अमेरिका में लंबी अवधि की ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं और महंगाई अब भी कोविड से पहले के स्तर से ज्यादा है।

भारत की कहानी मजबूत, पर रफ्तार में हल्की सुस्ती

रिपोर्ट कहती है कि भारत की असली आर्थिक कहानी अब भी मजबूत है। रियल GDP ग्रोथ लंबे समय से टिकाऊ बनी हुई है। लेकिन नॉमिनल GDP ग्रोथ में आई नरमी ने सरकार और कंपनियों दोनों को सतर्क कर दिया है। इसका असर टैक्स वसूली, कंपनियों की कमाई और वेतन बढ़ोतरी पर दिख रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि FY26 में भारत की आर्थिक ग्रोथ टिके रहने की पूरी संभावना है। महंगाई के नीचे आने से लोगों की जेब पर दबाव कम हुआ है और खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। इसी आधार पर RBI ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। यह संकेत है कि भारत की ग्रोथ मशीन अब भी चल रही है।

विदेशी मोर्चे पर दबाव, रुपये की परीक्षा

रिपोर्ट बताती है कि भारत का माल व्यापार घाटा बढ़ा है। सेवाओं के निर्यात और विदेश से आने वाली रकम ने हालात को संभाल रखा है, लेकिन विदेशी निवेशकों की निकासी ने दबाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ा है, जो डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है।

HDFC म्यूचुअल फंड के अनुसार RBI की महंगाई नियंत्रण नीति ने असर दिखाया है। CPI में गिरावट व्यापक रही है और अब महंगाई पहले के मुकाबले काफी नीचे है। आने वाले महीनों में सामान्य मानसून और GST में कटौती से हालात और बेहतर रहने की उम्मीद है। हालांकि कुछ चीजों की कीमतें अब भी चिंता का कारण बनी हुई हैं।

सरकारी खजाना, संतुलन की लड़ाई

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने हाल के वर्षों में राजकोषीय अनुशासन को मजबूत किया है। टैक्स कलेक्शन GDP के अनुपात में बढ़ा है और खर्च को भी काबू में रखने की कोशिश जारी है। FY26 में घाटे के लक्ष्य पूरे होने की संभावना जताई गई है और FY27 में भी यही रास्ता अपनाने के संकेत हैं।

रिपोर्ट बताती है कि RBI ने सिस्टम में भरपूर नकदी बनाए रखने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। इससे छोटी अवधि की ब्याज दरें नीचे आई हैं, लेकिन लंबी अवधि की यील्ड ऊपर बनी हुई हैं। यील्ड कर्व का यह बदलाव आने वाले समय की बड़ी कहानी बन सकता है।

आखिरी बात, राहत भी है और खतरा भी

रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है। दुनिया में डर और अनिश्चितता जरूर है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत बनी हुई है। महंगाई काबू में है, ग्रोथ चल रही है, लेकिन वैश्विक राजनीति, ट्रेड टेंशन और विदेशी निवेश की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा। यही तय करेगा कि यह राहत कितनी देर टिकेगी।

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