डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मासेदी सोमवार को नयी दिल्ली में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहय्ान के साथ।-प्रेट्र
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोमवार को सीमा पार आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की और कहा कि आतंकवाद के सभी कृत्यों के समर्थकों एवं वित्तपोषकों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए। दोनों पक्षों ने कहा कि कोई भी देश आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह न बने।
यह सख्त संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की संक्षिप्त यात्रा पर आये यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान के बीच बातचीत के दौरान दिया गया। दोनों नेताओं ने टेरर फंडिंग रोकने और धन शोधन विरोधी उपायों को सशक्त करने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ढांचे के तहत सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति नाह्यान ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक एजेंडा पेश किया। दोनों देशों के बीच 2032 तक वार्षिक व्यापार के लिए 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया। एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने पर सहमति व्यक्त की गई। साथ ही ऊर्जा, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई गई।
मोदी ने दिल्ली हवाई अड्डे पर अल नाह्यान का गले मिलकर स्वागत किया और फिर वे एक ही वाहन में प्रधानमंत्री आवास तक साथ गए, जहां उन्होंने प्रतिनिधिमंडल स्तर के प्रारूपों में बातचीत की। यूएई के नेता की लगभग साढ़े तीन घंटे की यात्रा समाप्त होने के बाद प्रेस वार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, ‘यह एक संक्षिप्त, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा रही।’ उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाने का फैसला किया है।
कृषि उत्पादों का बढ़ेगा निर्यात
मिसरी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता खाद्य क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा और भारत से संयुक्त अरब अमीरात को खाद्य उत्पादों तथा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करेगा। इससे भारत के किसानों को लाभ होगा।
दोनों पक्षों में अहम समझौते :
– प्रतिवर्ष पांच लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर।
– एआई में सहयोग बढ़ाने पर सहमति। यूएई के साथ साझेदारी में भारत में एक ‘सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर’ स्थापित करने के लिए सहयोग करने का निर्णय।
– खाड़ी देश भारत में डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर भी विचार करेगा।
– रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक ढांचागत समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर।
– अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त कार्य के लिए भी एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
