कॉलेज की एनएसएस इकाई द्वारा राष्ट्रीय युवा सप्ताह समारोह का आयोजन प्रशंसनीय- कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर
स्वामी विवेकानन्द के बताएं रास्ते पर चलकर ही युवाओं के बल पर भारत 2047 तक विकसित होकर बनेगा विश्वगुरु- डॉ. चौरसिया
भाषण प्रतियोगिता में श्रुति सिन्हा, पोस्टर पेंटिंग में रिया कुमारी तथा रंगोली में साक्षी कुमारी ने पाया प्रथम स्थान


समस्तीपुर : जीकेपीडी कॉलेज, कर्पूरीग्राम, समस्तीपुर की एनएसएस इकाई-2 के तत्त्वावधान में स्वामी विवेकानन्द जयंती के अवसर पर आयोजित “राष्ट्रीय युवा सप्ताह” का समापन समारोह केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर की अध्यक्षता में कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें विशिष्ट अतिथि नमिता कुमारी एवं डॉ. स्नेहा तथा मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के एनएसएस समन्वयक डॉ. आरएन चौरसिया ने (ऑनलाइन), विषय प्रवेशक प्रधानाचार्य पूर्व विद्यासागर ठाकुर आदि ने महत्वपूर्ण विचार रखे।

इस अवसर पर संगोष्ठी के साथ ही भाषण, रंगोली एवं पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र तथा मेडल प्रदान किया गया। भाषण प्रतियोगिता में श्रुति सिन्हा- प्रथम, प्रज्ञा कुमारी- द्वितीय तथा रवि प्रकाश ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में रिया कुमारी- प्रथम तथा कार्तिकी राज ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि रंगोली प्रतियोगिता में साक्षी कुमारी- प्रथम, खुशी कुमारी- द्वितीय, शोभा कुमारी तथा अभिलाषा कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों में प्रो गौरी शंकर झा, प्रो. दिनेश प्रसाद तथा प्रो हरि प्रसाद शामिल थे, जबकि रंगोली प्रतियोगिता में डॉ. ममता कुमारी, प्रो. पुष्पा कुमारी, प्रो. चन्द्रावती, प्रो. रीता कुमारी, प्रो. पुष्पलता कुमारी तथा प्रो. शशि कुमारी के नाम शामिल हैं। वहीं पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रो. ब्रजमोहन सारस्वत, प्रो. सुनील कुमार राय, प्रो. समर्पण कुमार तथा प्रो. प्रमोद पासवान शामिल थे। इस अवसर पर डॉ. विमल चौबे तथा प्रधान सहायक नित्यानंद ठाकुर आदि सक्रिय रहे।

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने विवेकानन्द के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कॉलेज की एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय युवा सप्ताह कार्यक्रमों की प्रशंसा की।
डॉ. चौरसिया ने स्वामी जी के विचारों को प्रासंगिक बताते हुए कहा कि विवेकानन्द भारत के महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व, बड़े समाजसुधारक, दार्शनिक एवं युवाओं के प्रेरणा स्रोत थे, जिनका मानना था कि युवा सिर्फ उम्र से नहीं, बल्कि अपने बुलंद हौसले तथा परिवर्तन की क्षमता रखने वाले सेवा भावना से होते हैं। युवाओं में अपार प्रतिभाएं एवं संभावनाएं छिपी हैं, जिन्हें स्वामी जी ने जगाया था। कहा कि युवाओं के बल पर ही भारत देश 2047 तक विकसित होगा तथा विश्वगुरु भी बनेगा। आज के दिन हम संकल्प ले की हम सब विवेकानन्द के सपनों का भारत बनाएंगे। हम अपनी ऊर्जा को व्यर्थ नहीं जाने देंगे ,बल्कि इसे एक दीपक की तरह जलाएंगे जो दूसरों के जीवन में भी रोशनी प्रदान करेगा। उन्होंने अंधविश्वास का कर विरोध किया था। वे नर की सेवा को वास्तव में नारायण की सेवा मानते हुए कहा था कि ईश्वर को मंदिर या मस्जिद में ढूंढने से पहले उसे पीड़ित एवं गरीब इंसान में देखो।
विषय प्रवेशक प्रो विद्यासागर ने कहा कि विवेकानन्द ने शिकागो धर्म सम्मेलन में पूरी दुनिया को सहिष्णुता, मानवता तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का पाठ पढ़ाया था। उनके विचार हमें स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के प्रति संवेदनशील बनाता है।
स्वागत संबोधन में कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. प्रेम कुमारी ने कहा कि स्वामी जी का युवाओं पर अटूट विश्वास था, जिनके विचार युवाओं को निराशा और आत्म-संदेह से बाहर निकलते हैं। विवेकानन्द के लिए शिक्षा का अर्थ मानव- निर्माण था, ताकि युवा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। उन्होंने धर्म को कर्मकांडों से निकाल कर समाजसेवा से जोड़ा। उनका विचार था कि सभी धर्म एक ही ईश्वर तक पहुंचाने के अलग- अलग मार्ग हैं। स्वामी जी ने कहा था कि जिस देश में नारियों का सम्मान नहीं होता, वह कभी उन्नति नहीं कर सकता है।
कार्यक्रम का संचालन एनएसएस इकाई-एक के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सुभाष चन्द्र राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. गुलाब यादव ने किया।
