अंतरराष्ट्रीय

Iran के लिए ट्रंप ने ऐसा क्या प्लान बनाया, UAE के राष्ट्रपति ने मोदी से मिलने के लिए अपना प्लेन भारत घुमाया, क्या बड़ा होने वाला है?

डेस्क: अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच चल रहे तनाव और मिडिल ईस्ट में फैली अशांति के बीच अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने संयुक्त अरब अमीरात यानी कि यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत आने वाले हैं। और रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कल यानी कि 19 जनवरी को दिल्ली आ सकते हैं। इस खबर के बाहर आते ही अमेरिका के वाशिंगटन से लेकर पाकिस्तान के इस्लामाबाद तक में जोरदार हड़कंप मच गया है। दिल्ली में होने वाली इस मीटिंग पर क्यों नजरें गड़ाए बैठे हैं? बता दें कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब खाड़ी देशों खासकर यूएई और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ रहा है। साथ ही ईरान को लेकर क्षेत्रीय समीकरण भी बदल रहे हैं।

ऐसे वक्त में भारत और यूएई अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक यूएई के राष्ट्रपति का यह दौरा भारत में महज आधे दिन का ही हो सकता है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे हैं और इसी मजबूत रिश्ते की वजह से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच पिछले 10 सालों में होने वाली कई बड़ी मुलाकातों में से एक होने वाला है। दरअसल भारत और यूएई ने रक्षा सहयोग को और बढ़ाने का काम किया है। ऐसे में कयास यह लगाए जा रहे हैं कि यूएई और भारत में आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की डील होने वाली है। दोनों देशों के बीच यह डिफेंस डील करीब 600 मिलियन डॉलर की है और यह डील कई मायनों में बहुत अहम है और इसीलिए इस पर सभी की नजरें हैं और पाकिस्तान की टेंशन की वजह भी है।

दरअसल हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के आकाश डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइल के छुड़ा दिए थे। और अब पाकिस्तान का करीबी दोस्त यूएई ही हिंदुस्तान से आकाश मिसाइल सिस्टम खरीदने वाला है। ऐसे में पड़ोसी मुल्क के थिंक टैंक अब अपनी ही सरकार को कोसे जा रहे हैं। यानी कि शहबाज सरकार को कोसे जा रहे हैं। आकाश के एक वार से दुश्मन के कई टारगेट तबाह किए जा सकते हैं। यही वजह है कि यूएई समेत दर्जनों मुल्क इसके मुरीद हैं। यही बात पाकिस्तानी वजीर शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ मुनीर के साथ-साथ उनकी आवाम को भी हजम नहीं हो पा रही है। बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात इकलौता मुस्लिम देश है जो मिडिल ईस्ट में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।

दुनिया की बात करें तो संयुक्त अरब अमीरात चीन और अमेरिका के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। संयुक्त अरब अमीरात ही भारत का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिटिशंस भी बन चुका है। साल 2022 में हुआ इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी कि सीईपीए एक बड़ा कदम साबित हुआ। 2025 में दोनों देशों के बीच गैर तेल व्यापार 37.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले साल की तुलना में 34% ज्यादा है और इससे उम्मीद की जा रही है कि साल 2030 तक दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर के गैर तेल व्यापार का लक्ष्य हासिल यह दोनों देश कर सकते हैं।

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