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हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस : वीर दास की फिल्म में नहीं दिखा नयापन, बिना सिर-पैर के एक्शन और कॉमेडी से किया निराश

डेस्क: ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ वीर दास की पहली डायरेक्टोरियल फिल्म है और यह 16 जनवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। आमिर खान द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म कॉमेडी, एक्शन, रोमांस और जासूसी थ्रिल का मिक्स है, जिसमें आपको बिना लॉजिक के बहुत कुछ देखने को मिलेगा। स्पाई-कॉमेडी जॉनर के अनुसार इस फिल्म में कुछ भी नया देखने को नहीं मिला, जिसे देख आपको मजा आ जाए। हालांकि, कहानी को ज्यादा खींचा नहीं गया है। वीर दास और इमरान खान की जासूसी-कॉमेडी ‘हैप्पी पटेल’ से काफी ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन इसकी कहानी इम्प्रेस करने में असफल रही। कहानी और फीके ह्यूमर की वजह से फिल्म उम्मीदों के अनुसार कमाल नहीं दिखा पाई।

हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस की कहानी

‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ 2026 की एक हिंदी स्पाई-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें वीर दास एक अनाड़ी ब्रिटिश जासूस हैप्पी पटेल का किरदार निभा रहे हैं, जो गोवा में एक गड़बड़ मिशन के दौरान एक क्रिमिनल गैंग से एक साइंटिस्ट को बचाते हुए अपनी भारतीय जड़ों के बारे में पता लगाता है। इस दौरान, एक्शन के साथ-साथ कॉमेडी और देश प्रेम की भी झलक देखने को मिलती है। एक स्मार्ट एजेंट होने के बावजूद, हैप्पी का मिशन उथल-पुथल भरी गलतियों और सांस्कृतिक गलतफहमियों से भरा होता है, क्योंकि वह भारत में अपने असाइनमेंट को पूरा करने की कोशिश करता है। खासकर गोवा के मस्ती भरे माहौल में, जिसमें वह फंस जाता है।

कहानी में आगे देखने को मिलता है कि हैप्पी पटेल (वीर दास) को रुपा (मिथिला पालकर) से प्यार हो जाता है, जिसका गोवा की लेडी गैंगस्टर मामा (मोना सिंह) से कनेक्शन होता है। लेकिन, रुपा की असली पहचान सबको बाद में बता चलती है। हालांकि, हैप्पी पटेल की इस मिशन में शुरूआत से अंत तक गीत (शारिब हाशमी) और रॉक्सी (सृष्टि तावड़े) मदद करते हैं, जो उसके दोस्त बन जाते हैं। वहीं, कहानी के अंत में देखने तो मिलता है कि हैप्पी अपने दोनों अंग्रेज पिता को छोड़ भारत में रहने का फैसला करता है।

हैप्पी पटेल की स्टार कास्ट का परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस के बारे में बात करें तो वीर दास ने अपने किरदार को बहुत ही अच्छे से निभाया हैं, जिन्होंने हैप्पी पटेल के अपने रोल में चार्म, ह्यूमर और हीरोइज्म का मिक्सचर पेश किया है। उनके कॉमिक टाइमिंग की तारीफ की जानी चाहिए। हैप्पी पटेल में आमिर खान का कैमियो था, जिसकी दमदार एंट्री ने कहानी को नए मोड़ पर पहुंचाया। उनके हर सीन ने कहानी में गहराई जोड़ दी और उसे खास बना दिया। इमरान खान ने धांसू कमबैक से सभी को सरप्राइज कर दिया। वह अपने किरदार को मैच्योरिटी और बैलेंस के साथ निभाते दिखाई दिए और अपने आस-पास की अफरा-तफरी को बहुत ही शांति से संभाला। वही, शारिब हाशमी की डायलॉग डिलीवरी, एक्सप्रेशन और नेचुरल ह्यूमर हर उस सीन को बेहतर बनाते हैं, जिसमें वह नजर आते हैं। फिल्म में मिथिला पालकर की एक्टिंग, उनके चार्म और इंटेलिजेंस की तारीफ भी होने चाहिए। उन्होंने अपने रोल से सबको हंसाने की कोशिश की और अपने को-स्टार्स के साथ नेचुरल और रिफ्रेशिंग केमिस्ट्री दिखाई। मोना सिंह की परफॉर्मेंस उनके किरदार के अनुसार कुछ खास नहीं थी। वहीं, सृष्टि तावड़े की एनर्जी और कॉन्फिडेंस ने उनके करिदार को शानदार बना दिया। वह आसानी से फिल्म की कहानी में ढल गईं और दर्शकों के दिलों-दिमाग में गहरी छाप छोड़ गईं।

निर्देशन

कवि शास्त्री और वीर दास का डायरेक्शन सच में जादुई, कॉन्फिडेंट, मजेदार और कंट्रोल्ड लगा है। हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस के डायलॉग्स में दम नहीं था, लेकिन हर सीन को बहुत ही अच्छे से डायरेक्ट किया गया है। वहीं, स्क्रीनप्ले पहले सीन से लेकर आखिरी फ्रेम तक, अपना जादू देखने में असफल रही।

फिल्म की कमजोरियां

कहानी में नए ट्विस्ट एंड टर्न्स की कमी खलती है। इस फिल्म में अचानक से प्यार और एक्शन शुरू हो जाता है। इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका एक्शन और कॉमेडी था, जो कहानी की सबसे अहम चीज थी। लॉजिक खोजेंगे तो निराश होंगे, क्योंकि कई सीन बिना सिर-पैर के हैं। कुछ सीन घिसे-पिटे फॉर्मूले पर आधारित  है, जो कहानी में अच्छे से फिट नहीं होते।

क्या हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस देखने लायक है?

वीर दास की ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ 2 घंटे की ऐसी राइड है जो पहले हाफ में हंसाती है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी बोरिंग लगती हैं। हालांकि, कहानी के दूसरे हाफ में बड़े दांव, चौंकाने वाले ट्विस्ट और संतोषजनक नतीजे देखने को मिलते हैं, जो कहानी को थोड़ा बेहतर बनाती है। फिल्म का क्लाइमैक्स देखने लायक है, जिसमें मामा और हैप्पी पटेल के बीच फनी कुकिंग बैटल देखने को मिलता है, जो बाद में एक डांसिंग फाइट में बदल जाता है। हालांकि, यह फिल्म 18 साल से कम के बच्चों के देखने लायक नहीं क्योंकि इसमें कई जगह अपशब्द या अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है। वीर दास ने एक अंग्रेज के रोल में हिंदी के कई शब्दों के अर्थ का अनर्थ कर दिया है, जो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यह फिल्म 5 में से एक 2 स्टार के लायक है, जिसे आप अपने दोस्तों के साथ एक बार देख सकते हैं।

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