
दरभंगा। अखिल भारतीय मिथिला संघ, दरभंगा के तत्वाधान में जी एम रोड स्थित होटल सितायन के सभागार में दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी स्वर्गीय काम सुंदरी देवी की श्रद्धांजलि सभा संघ के अध्यक्ष, विनय कुमार झा उर्फ संतोष झा की अध्यक्षता में किया गया। सदस्यों ने महारानी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा अर्पित किया। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष, विनय कुमार झा उर्फ संतोष झा ने कहा दरभंगा की पहचान दरभंगा महाराज से है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व दरभंगा महाराज के द्वारा स्थापित उद्योग से संपूर्ण मिथिलांचल वासी खुशहाली की जिंदगी जी रहे थे। सकरी चीनी मिल,लोहत चीनी मिल, आर्यावर्त इंडियन नेशन, मिथिला मिहिर, आदि अनेक संस्थानो दरभंगा राजघराने द्वारा संचालित होता था। उस समय मिथिला के लोग अपने राज्य से बाहर पलायन नहीं करते थे। देश के महानगरों में दरभंगा का शिक्षण संस्थान, सहित विभिन्न जगहों पर दरभंगा हाउस बनाया गया था। उन्होंने कहा इंग्लैंड के लंदन में भी दरभंगा हाउस बनाए गए थे। लंदन के लोग बिहार का नाम तो नहीं जानते है लेकिन दरभंगा का नाम जरुर जानते है। दरभंगा को यह पहचान दरभंगा महाराज द्वारा दिलाया गया था। दरभंगा राजघराना देश के गौरवशाली राजघरारों में से एक है। जिन्होंने बीएचयू की स्थापना की थी दिल्ली विश्वविद्यालय,कोलकाता विश्वविद्यालय,पटना विश्वविद्यालय,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में महाराजा कामेश्वर सिंह ने दरभंगा हाउस बनाकर दान में दिए। दरभंगा में अपना भवन भी कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को शिक्षा के लिए दान में दिए। साथ ही साथ उन्होंने प्रिया पुअर होम,गौशाला, सहित कई महाविद्यालय,डीएमसीएच,हवाई अड्डा और तीन एयरक्राफ्ट सरकार को दान में दे दिया। दरभंगा राजघराने के द्वारा दान में सभी वर्ग के गरीबों दलितो असहायों और जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए दिया गया। श्री विनय झा ने कहा ऐसे दानवीर दरभंगा के अंतिम महारानी के मृत्यु पर राज्य सरकार के द्वारा राजकीय सम्मान नहीं देना दरभंगा की जनता के भावनाओं के खिलाफ है। एक ऐसा परिवार जिसने अंग्रेजों से चल रही आजादी की लड़ाई में भी बढ़ चढ़कर भाग लिया। अंग्रेजों के शासनकाल में स्वतंत्रता आंदोलन में महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह ने कांग्रेस की बैठक की इलाहाबाद में अंग्रेजों द्वारा बंद कर दिया। जिसे महाराजा कामेश्वर सिंह ने उस भवन को रातों-रात खरीद कर आंदोलन कार्यों की बैठक कराया। जिसे आज बिहार सरकार भूल चुकी है। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा दरभंगा राज परिवार को भारत रत्न दिए जाने की मांग की और दुख व्यक्त करते हुए कहा जो सम्मान महारानी काम सुंदरी देवी को राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा मिलना चाहिए था नहीं दिया गया। सोशल एक्टिविस्ट प्रियंका झा ने कहा देश की इकलौती महारानी काम सुंदरी देवी को राज्य सरकार ने राजकीय समान नहीं दिया और ना ही उनके सम्मान में एक दिन के लिए राष्ट्रीय झंडा को नीचा किया गया। दिनेश गंगानी, कांग्रेस नेता ने कहा शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में सराहनीय कदम और दरभंगा राज परिवार द्वारा समाज कल्याण के किए गए कार्य को बुलाया नहीं जा सकता है। कुमार कपिलेश्वर सिंह राज परिवार के वंशज है अपने परिवार के धरोहर की रक्षा कर रहे हैं। दीपक झा ने कहा महारानी काम सुंदरी को सरकार के द्वारा राजकीय सम्मान नहीं देना, सलामी नहीं देना यह सिर्फ दरभंगा राज परिवार ही नहीं बल्कि पूरे मिथिलांचल का अपमान है।
अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार शोक सभा एवं श्रद्धांजलि सभा में रखा। मंच संचालन संघ के उपाध्यक्ष, रामनाथ पंजियार एवं धन्यवाद ज्ञापन संघ के प्रवक्ता रौशन कुमार झा के द्वारा किया गया। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष विनय कुमार झा ऊर्फ संतोष झा, उपाध्यक्ष, रामनाथ पंजियार, संयुक्त सचिव,अधिवक्ता,शैलेंद्र कुमार कश्यप, प्रवक्ता रौशन कुमार झा, युवा नेता, दीपक झा,सोशल एक्टिविस्ट,प्रियंका झा,पूर्व पार्षद उपेंद्र शर्मा,कांग्रेस नेता दिनेश गंगनानी,रमन कुमार झा,फूल कुमार झा टेकटारिया,मैथिली साहित्यकार,उदय शंकर मिश्र,बलजीत झा,विनयकांत झा उर्फ मुन्ना, कांग्रेस नेता रमन झा,समर झा,हुसैन मंसूरी,गुड्डू मिश्रा,रामानंद ठाकुर,अजीत चौधरी उर्फ बिट्टू चौधरी,पंकज ठाकुर,हुसैन मंसूरी,नटवर महतो,गणेश मंडल सहित अन्य मौजूद रहे।