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दरभंगा : स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवाओं में राष्ट्र चेतना का संचार : KSDSU में युवा सप्ताह का शुभारंभ

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय युवा महोत्सव, जो अब युवा सप्तह (12 से 19 जनवरी) के रूप में मनाया जा रहा है, का शुभारम्भ 15 जनवरी 2026 को किया गया। ।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो० लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने की। कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के छात्रों विपिन झा एवं सोमनाथ झा द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्र सावन द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) का लक्ष्य गीत प्रस्तुत किया गया।
यह कार्यक्रम कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), युवा चेतना मंच एवं भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में युवा चेतना मंच के अध्यक्ष, महारानी अधिरानी रमेश्वर लता संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य
तथा विश्वविद्यालय के सी.सी.डी.सी. डॉ० दिनेश झा ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० उदयकांत शाह ने कहा कि भारत युवाओं का देश है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा—
“डरो मत, कर्म करो। आचरण ही युवाओं का आदर्श होना चाहिए। आत्मविश्वास का अभाव पाप है।”
उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर कर्म करते रहना ही युवाओं का कर्तव्य है— “उठो, जागो और तब तक कर्म करते रहो जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
डॉ० शाह ने भारतीय शिक्षण मंडल के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा में भारतीय मूल्यों और संस्कृति का समावेश कर राष्ट्रीय पुनरुत्थान लाना ही इसका प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने संगठन की विभिन्न गतिविधियों— महिला गतिविधि सहित अन्य सामाजिक कार्यों की जानकारी दी तथा यह भी बताया कि युवाओं को 3 से 5 वर्ष राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करने की भावना विकसित करनी चाहिए।
सारस्वतातिथि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, छात्र कल्याण प्रो० पुरेन्द्र बारिक ने कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि युवाओं के आगे बढ़ने से परिवार, समाज और राष्ट्र का विकास संभव है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को युवाओं के लिए एक चुनौती बताया।
छात्र प्रतिनिधि करते हुए शोधछात्र राजेश ने कहा कि युवाओं को तब तक कर्म करते रहना चाहिए जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, साथ ही यह भी विचार करना आवश्यक है कि लक्ष्य क्या होना चाहिए। उन्होंने आध्यात्मिक चेतना को व्यक्तित्व विकास का आधार बताया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय कुलपति प्रो० लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्र का युवा कैसा हो— इसके लिए सिद्धांतों की स्पष्टता आवश्यक है। उन्होंने उन आदर्शों का उल्लेख किया जिनके कारण भारत विश्वगुरु बना।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भारतीय ज्ञान परंपरा है, जिसकी ओर हम निरंतर अग्रसर हैं।
कुलपति ने युवा चेतना मंच की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच सदैव सन्नद्ध रहता है। उन्होंने RSS के 100 वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न संगठन राष्ट्र सेवा और राष्ट्रभाव के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि युवा पक्ष के अंतर्गत विवेकानन्द, अम्बेडकर, पटेल, सुभाषचंद्र बोस जैसे महापुरुषों के विचारों पर चर्चा की जाएगी तथा यह सप्ताह महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस के साथ सम्पन्न होगा।
उन्होंने युवाओं से स्वधर्म, स्वदेश, सांस्कृतिक चेतना, नशा-मुक्त जीवन, स्त्री सम्मान और सामाजिक संवेदनशीलता अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने विकास के विभिन्न आयामों— ज्ञानात्मक, संवेगात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास पर प्रकाश डालते हुए स्वामी विवेकानन्द के “Brothers and Sisters” संबोधन में निहित एकता के संदेश को रेखांकित किया।
उन्होंने एक कविता के माध्यम से राष्ट्र के आदर्श युवा की संकल्पना प्रस्तुत की और स्वामी विवेकानन्द के प्रति श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ० सुधीर कुमार ने किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन स्नातकोत्तर इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ० साधना शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में प्रो० दयानाथ झा, प्रो० दिलीप कुमार झा ने भी अपने विचार रखे। इसके अतिरिक्त डॉ० उमेश झा, डॉ० सविता आर्या, डॉ० यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ० शम्भु शरण तिवारी, डा. रामसेवक झा, डॉ० धीरज कुमार पाण्डेय, डॉ० कुन्दन कुमार, डॉ० प्रीति रानी सहित अनेक शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
NSS विभाग के कर्मचारियों— सुधीर सहित अन्य कर्मियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

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