डेस्क: ईरान में महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ भड़का जनआक्रोश अब केवल रोजमर्रा की परेशानियों तक सीमित नहीं रह गया है. यह आंदोलन धीरे-धीरे देश की सर्वोच्च सत्ता को सीधी चुनौती देता नजर आ रहा है. हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि विरोध प्रदर्शन ईरान के 31 प्रांतों के 111 शहरों और कस्बों तक फैल चुके हैं. हर गुजरते दिन के साथ हिंसा बढ़ती जा रही है और देश एक गहरे राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है.
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 62 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब 2,300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. सरकार विरोधी प्रदर्शनों के तेज होने के बाद सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई खुद सामने आए और प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला बोला.
पीछे न हटने के मूड में खामेनेई
सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि वह किसी भी सूरत में झुकने वाले नहीं हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर आरोप लगाया कि वे विदेशी ताकतों और दूसरे देशों के नेताओं को खुश करने के लिए अपने ही देश की सड़कों को आग के हवाले कर रहे हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं. कई शहरों से सामने आए वीडियो में सड़कों पर जलती गाड़ियां, आग की लपटों में घिरी इमारतें और उग्र भीड़ दिखाई दी. टेलीविजन पर देश के नाम संबोधन में खामेनेई ने दावा किया कि यह आंदोलन प्रवासी विपक्षी गुटों और अमेरिका के इशारे पर चलाया जा रहा है. उन्होंने कसम खाई कि वे किसी भी दबाव के आगे पीछे नहीं हटेंगे.
सड़कों पर गूंजे आज़ादी के नारे
इस आंदोलन को और तेज करने में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की भूमिका अहम मानी जा रही है. उन्होंने 8 और 9 जनवरी 2026 को रात 8 बजे देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया था. 8 जनवरी की रात विरोध प्रदर्शनों ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी, जिसके बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं पूरी तरह बंद कर दीं. न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों ने सड़कों पर “आज़ादी-आज़ादी” के नारों के बीच सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी. कुछ मानवाधिकार संगठनों ने देश के दक्षिणी हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग की खबरें भी दी हैं.
“ट्रंप का भी पतन होगा”: खामेनेई का बयान
देश के नाम संबोधन में खामेनेई ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ट्रंप को यह याद रखना चाहिए कि फिरौन, निमरूद, रजा शाह और मोहम्मद रजा जैसे तानाशाह अपने घमंड के चरम पर गिराए गए थे. खामेनेई ने चेतावनी देते हुए कहा, “ट्रंप का भी पतन होगा.” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सत्ता लाखों कुर्बानियों के बाद हासिल की गई है और वह “भाड़े के लोगों” के सामने कभी नहीं झुकेंगे.
रजा पहलवी की अमेरिका से खुली अपील
इस बीच रजा पहलवी ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद की गुहार लगाई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि लाखों ईरानी नागरिक सड़कों पर गोलियों का सामना कर रहे हैं और अब तो संचार व्यवस्था भी पूरी तरह ठप कर दी गई है. उन्होंने कहा कि न इंटरनेट चल रहा है, न लैंडलाइन फोन, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हस्तक्षेप के लिए आगे आना चाहिए.
“खामेनेई को सत्ता के अंत का डर सता रहा है”
रजा पहलवी ने खामेनेई पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सर्वोच्च नेता को अपने “आपराधिक शासन” के अंत का डर सता रहा है, इसी वजह से वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्रूरता पर उतर आए हैं. उन्होंने दावा किया कि संचार व्यवस्था बंद कर युवा प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है. पहलवी ने ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने, सुरक्षा बलों को भारी संख्या में घेरने और स्वतंत्रता के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि हालिया प्रदर्शनों से सरकार पर दबाव बढ़ा है, लेकिन समय बहुत कम है और आने वाले घंटों में हालात और विस्फोटक हो सकते हैं.
