डेस्क: ईरान इस समय एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. राजधानी तेहरान से लेकर दूरदराज़ के प्रांतों तक विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं. प्रदर्शनकारियों के निशाने पर देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई हैं और सड़कों पर लग रहे नारे इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि जनता के भीतर गहरी नाराज़गी पनप रही है. आधिकारिक तौर पर इन प्रदर्शनों की वजह महंगाई, बेरोज़गारी और चरमराती अर्थव्यवस्था बताई जा रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नज़र रखने वाले कई विश्लेषक इसके पीछे किसी बड़े भू-राजनीतिक खेल की भी आशंका जता रहे हैं.
इन आंदोलनों को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज़ हो गई है क्योंकि कुछ जगहों पर ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में नारे सुनाई दिए हैं. इसी के साथ यह सवाल उठने लगा है कि क्या 46 साल से कायम इस्लामिक शासन के लिए यह दौर किसी बड़े बदलाव की भूमिका बन सकता है.
अमेरिका और सत्ता परिवर्तन की बहस
दुनिया भर में लंबे समय से यह धारणा रही है कि अमेरिका वैश्विक राजनीति में ‘डीप स्टेट’ के ज़रिये कई देशों की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करता रहा है. आरोप लगते रहे हैं कि जहां भी कोई सरकार अमेरिकी हितों के खिलाफ जाती है, वहां राजनीतिक दबाव, असंतोष और जन आंदोलन को हवा देकर सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाया जाता है. बांग्लादेश, वेनेजुएला, अफगानिस्तान, इराक और सीरिया जैसे देशों के उदाहरण अक्सर इस बहस में सामने आते रहे हैं. अब ईरान में चल रहे आंदोलनों और रजा पहलवी के नाम के नारों को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. कई जानकार मानते हैं कि यह केवल आर्थिक नाराज़गी नहीं, बल्कि सत्ता के ढांचे को चुनौती देने की एक बड़ी प्रक्रिया हो सकती है.
कौन हैं रजा पहलवी
रजा पहलवी, ईरान के आख़िरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं. उनके पिता दशकों तक ईरान के शासक रहे, लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति ने पूरे देश की सियासत की दिशा बदल दी. उस दौर में गंभीर बीमारी से जूझ रहे मोहम्मद रजा पहलवी को अपने परिवार के साथ ईरान छोड़ना पड़ा और तभी से पहलवी परिवार निर्वासन में रह रहा है. ईरान से बाहर रहते हुए ही रजा पहलवी को क्राउन प्रिंस की उपाधि दी गई थी. अमेरिका और पश्चिमी देशों से इस परिवार के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं, जबकि मौजूदा ईरानी सत्ता की नीतियां लंबे समय से अमेरिका विरोधी रही हैं. फिलहाल 65 वर्षीय रजा पहलवी ईरान से बाहर ही रह रहे हैं, लेकिन समय-समय पर वे ईरान में लोकतांत्रिक और उदार शासन की वकालत करते रहे हैं.
अमेरिका से जुड़ाव और पृष्ठभूमि
रजा पहलवी को उत्तराधिकारी के तौर पर बचपन से ही तैयार किया गया था. उनके पिता को 1967 में औपचारिक रूप से ईरान का शाह घोषित किया गया था. युवावस्था में रजा पहलवी ईरानी वायुसेना में कैडेट रहे. बाद में जब परिवार को देश छोड़ना पड़ा, तो उन्होंने अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग ली. पश्चिमी शिक्षा और मूल्यों में पले-बढ़े रजा पहलवी और उनका परिवार ईरान में एक अपेक्षाकृत उदार, आधुनिक और पश्चिम समर्थक व्यवस्था के पक्षधर माने जाते हैं. हालांकि बीते करीब 45 वर्षों से उनका देश में कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक रोल नहीं रहा है.
क्या बदलने जा रही है ईरान की राजनीति?
आज जब ईरान की सड़कों पर सत्ता के खिलाफ नारों के बीच रजा पहलवी का नाम भी गूंज रहा है, तो यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या देश एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ की ओर बढ़ रहा है. क्या लगभग पांच दशक बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की ज़मीन तैयार हो रही है, या यह आंदोलन भी पहले की तरह दबा दिया जाएगा—इसका जवाब आने वाला समय ही देगा. फिलहाल इतना साफ़ है कि ईरान में उबाल केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है.
