डेस्क: ताइवान की वायुसेना इन दिनों गंभीर चिंता में है. एक अमेरिकी निर्मित F-16 फाइटर जेट रहस्यमय हालात में लापता हो गया है, जबकि उसका पायलट अब तक नहीं मिल पाया है. इस घटना के बाद ताइवान ने अपने सभी F-16 लड़ाकू विमानों की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं और ट्रेनिंग मिशन भी निलंबित कर दिए गए हैं.
यह वही F-16 फ्लीट है, जिसने कुछ समय पहले चीन के लड़ाकू विमानों को लॉक कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था. ऐसे में अचानक इस जेट का गायब होना न सिर्फ ताइवान, बल्कि अमेरिका के लिए भी चिंता का विषय बन गया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज तकनीकी खराबी थी या फिर इसके पीछे चीन की कोई रणनीतिक चाल छिपी है.
घटना कैसे हुई? क्या है पूरा मामला
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना मंगलवार रात की है. ताइवान के उत्तर-पूर्वी तट के पास स्थित ह्वालिएन एयर बेस से एक F-16 फाइटर जेट नियमित नाइट ट्रेनिंग मिशन पर रवाना हुआ था. यह विमान अकेला नहीं था, बल्कि अन्य लड़ाकू विमानों के साथ एक फॉर्मेशन में उड़ान भर रहा था.
जैसे ही यह समूह बादलों के भीतर दाखिल हुआ, अचानक एक F-16 जेट बाकी विमानों से अलग हो गया. कुछ ही सेकंड के भीतर यह विमान तेजी से नीचे की ओर गिरने लगा. इसके तुरंत बाद रडार से उसका संपर्क टूट गया. उस समय विमान की ऊंचाई लगभग 1,700 फीट बताई जा रही थी, जो किसी फाइटर जेट के लिए बेहद खतरनाक स्तर माना जाता है.
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि विमान समुद्र में गिर गया.
पायलट का क्या हुआ?
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने लापता पायलट की पहचान कैप्टन हसिन पो-यी के रूप में की है. अधिकारियों के अनुसार, विमान के रडार से गायब होने से कुछ क्षण पहले पायलट ने संकेत दिया था कि वह इजेक्ट करने की कोशिश करेगा.
हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पायलट सफलतापूर्वक विमान से बाहर निकल पाया या नहीं. यही वजह है कि खोज और बचाव अभियान को और तेज कर दिया गया है.
क्या चीन का हाथ हो सकता है?
ताइवान और चीन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. ऐसे में जब भी ताइवान का कोई सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहला सवाल चीन की भूमिका को लेकर उठता है. इस मामले में भी यही सवाल सामने आ रहे हैं.
हालांकि, ताइवान की वायुसेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रारंभिक जांच में किसी बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले हैं. अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती तौर पर यह मामला तकनीकी खराबी से जुड़ा लग रहा है.
जांच के मुताबिक, विमान के मुख्य ऑनबोर्ड कंप्यूटर सिस्टम में खराबी आ गई थी. इस खराबी के कारण पायलट के सामने मौजूद स्क्रीन पर विमान की उड़ान दिशा यानी फ्लाइट पाथ दिखना बंद हो गया. यह स्थिति किसी भी लड़ाकू विमान के लिए बेहद खतरनाक होती है, खासकर तब जब उड़ान रात में और घने बादलों के बीच हो.
F-16 क्यों है इतना अहम?
F-16 एक अमेरिकी निर्मित मल्टी-रोल फाइटर जेट है और ताइवान की वायुसेना की रीढ़ माना जाता है. हाल के महीनों में इन्हीं विमानों ने चीनी लड़ाकू विमानों की गतिविधियों पर नजर रखी और कई बार उन्हें लॉक भी किया.
इसी वजह से इस हादसे ने अमेरिका की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि F-16 न केवल ताइवान की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है, बल्कि अमेरिका-ताइवान सैन्य सहयोग का भी प्रतीक माना जाता है.
