प्रयागराज (ब्यूराे)। किसी शादीशुदा महिला की जिंदगी सास की सितम से नारकीय हो गई हो तो किसी का पति ही उसके लिए विलेन बन गया है. जिस पति ने अग्नि को साक्षी मान कर सातों जन्म तक साथ देने का वचन दिया था आज वही उसी पत्नी का दुश्मन बन गया है.
मायके से हसीन सपनों व नई जिंदगी की शुरुआत का सपना लेकर डेहरी पर पहुंची जिस बहू को सास बड़े गर्व से उतारा था, वही बहू वर्षों बाद अब उसकी आंखों की किरकरी बन गई है. ससुराल से ठुकराई गई इन महिलाओं के जख्मों पर थाना पुलिस भी नमक रगड़ने में पीछे नहीं है. प्रताड़ना की शिकार महिलाएं मदद के लिए थाने पहुंची तो उन्हें वहां भी झिड़की और व शिकायतों की अनदेखी का शिकार हो गईं. अपनों से ठुकराई गई कोई महिला बच्चों के साथ मायके में अंदर ही अंदर सुबक रही तो कोई पति व भरे पुरे ससुरालीजन व ससुराल का मकान होते हुए किराए पर रहने के लिए विवश है. पढ़ने में यह बातें आप को एक कहानी या स्टोरी जरूर लग रही होगी, मगर यकीन मानिए कि जिले की उन तमाम महिलाओं का दर्द है, जो फरियाद लेकर बुधवार को हर जगह से निराश होकर मदद की दरकार लिए राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता विश्वकर्मा के पास पहुंची थीं.
मदद के बजाय टरकाती रही पुलिस
आंखों में मदद व इंसाफ और हक पाने की आश लिए यहां पहुंची हर महिला की अपनी एक दर्द भरी कहानी और वेदना सामने आई. शहर के सर्किट हाउस में सुबह 11 बजे से शुरू हुई सुनवाई में दो मासूम बच्चों को गोद में लेकर पिता के साथ पहंची आंचल सोनी वेदना बताते हुए फफक कर रो पड़ी. उसका यह था कि पति जब तक पति जिंदा थे उसी पिरवार के लिए हम बहुत अच्छे थे. पति की मौत होते ही उसी सास और परिवार के लिए हम दुश्न हो गए. आज ससुराल के लोग पति का हिस्सा तो दूर घर में रहने तक नहीं दे रहे हैं. उसकी वेदना और दशा हाल में मौजूद हर किसी के दिल को कुरेद कर रख देने वाली रही. उसने बताया कि मदद के लिए पुलिस के पास पहुंची तो उसे वहां से भी निरासा ही हाथ लगी. इसी तरह प्रतिभा पांडेय ने जो बातें बताईं वह और भी चौंकाने वाली रही. राज्य महिला आयोग की सदस्य से इंसाफ की गुहार लगाते हुए उसने बताया कि वह जीवित है और तलाक भी नहीं हुआ बावजूद इसके पति दूसरी शादी कर लिया. इतना ही नहीं, उसे भगाकर दूसरी पत्नी के साथ घर में रह रहा है. सुबूत के तौर पर उसने जो पति के द्वारा बदन पर दिए गए जख्म की फाइल को दिखाई तो महिला आयोग की सदस्य का भी कलेजा द्रवित हो उठा. वहीं निषा तिवारी अपने ही परिवार के लोगों द्वारा जमीन पर कब्जा व मारपीट से परेशान होकर यहां तक इंसाफ की उम्मीद के लिए. इसी तरह दो बजे तक चली सुनवाई में 32 महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई. जिनमें सर्वाधिक शिकायतें ससुराल में सांस, ससुर व पति अथवां पति के भाई द्वारा सताए जाने पर घर छोड़कर दूसरी जगह रहने को मजबूर रहीं.
आयोग की सदस्य ने लगाई फटकार
महिलाओं की वेदना व शिकायत सुनने के बाद राज्य महिला आयोग की सदस्य का पारा अचानक चढ़ गया. उन्होंने थानों में तैनात पुलिस पर सख्त नाराजगी जताते हुए सुनवाई में मौजूद अफसरों को चेतावनी दीं. कहा कि इतनी सारी महिलाएं यहां आई हैं और सभी थाने पहुंची पर उनकी मदद नहीं की गई. दस पाचं महिला झूठ बोल सकती है मगर सारी पीड़ित महिलाएं थाने में पुलिस से मदद नहीं मिलने की बात एक साथ ऐसे ही तो नहीं बोल रहीं. पुलिस विभाग यह तय करे कि पीड़ित महिलाएं थाने या चौकी पर जाएं तो उनकी शिकायत सुनें और बगैर देर किए समस्या का समाधान कराएं. टाल-मटोल वाली नीति यदि अगली सुनवाई में सामने आई तो वह सख्त एक्शन के लिए पत्र शासन को लिखेंगी.
पति की दो साल पूर्व मौत हो गई थी. हमारे दो बच्चे हैं, अब ससुराल वाले हमें नहीं रहने दे रहे हैं. उन्होंने घर से भगा दिया. पुलिस के पास मदद के लिए कई बार गई. हमारी कोई बात नहीं सुनी गई. ससुराल वाले पति का हिस्सा भी नहीं दे रहे हैं. हम पति की मौत के बाद से ही बच्चों के साथ मायके में रह रहे हैं. वहां जाने की कोशिश की थी, मगर सास व अन्य लोग मारने पीटने लग, इस पर पापा के घर भाग आई.
आंचल सोनी, सरायममरेज मदारीपुर
हमारे पति अपना व्यापार करते हैं, परिवार के लोग हमारी जमीन कब्जा कर रखे हैं. वह संख्या बल में काफी मजबूत हैं. हम अपनी ही जमीन नहीं ले पा रहे हैं. पति जब अपनी जमीन लेने की बात करते हैं तो वह लोग मारते पीटते हैं. हमें धमकी देते हैं कि तुम्हारे पति की हत्या करके विधवा बना देंगे. गालियां भी देते हैं. शिकायत थाने में किए तो वह लोग हम पर ही शांत रहने का दबाव बनाते हैं.
निषा त्रिपाठी, मांडा नहवई
मैं कोलकाता की रहनी वाली हूं. मेरी शादी बैरहना निवासी राजेश से हुई है. वह हमें बहुत मारता पीटता था, बच्चे छोटे थे सारा जुल्म सहती गई. पति ने बगैर तलाक के दूसरी शादी कर ली और वह उसी के साथ रह रहे हैं. दूसरी शादी का विरोध की तो इतना मारा की सिर तक फट गया. अब बच्चों के साथ अशोक नगर में किराए पर रह रही हूं.
