गोरखपुर: जिले में सामने आए कई मामलों ने माध्यमिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे प्रमुख मामला महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के शिक्षक वीरेंद्र पटेल का है, जिन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद भी अब तक इंक्रीमेंट और अन्य देय लाभ नहीं मिल सका है।दिसंबर 2024 में वीरेंद्र पटेल का चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ था। 13 दिसंबर को राज्यपाल द्वारा फाइल पर हस्ताक्षर किए गए और 28 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों उन्हें सम्मानित भी किया गया। सम्मान के बाद शिक्षक ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर फाइल जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में संबंधित बाबू के पटल पर जमा कर दी।
इसके बावजूद एक वर्ष बीतने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। शिक्षक का कहना है कि केवल सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर शेष हैं, लेकिन फाइल लंबे समय से धूल फांक रही है। दूसरा मामला बापू इंटर कॉलेज पीपीगंज के शिक्षक रमेश राय का है, जो छह महीने से चयन वेतनमान के लिए चक्कर काट रहे हैं। विभाग कैरेक्टर रोल में पूर्व प्रधानाचार्य की एंट्री न होने का हवाला देकर फाइल लौटा रहा है। इसके बाद मामला चरगांवा जनता इंटर कॉलेज का है, जहां पिछले दो वर्षों से करीब कई शिक्षकों को बोनस नहीं मिला है। शिक्षक रजनीश श्रीवास्तव का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा। वहीं कुछ शिक्षकों का छह महीने से एक वर्ष तक के बीच का प्रोन्नत वेतनमान लंबित है। शिक्षकों का आरोप है कि डीआईओएस कार्यालय में पटल बाबुओं द्वारा कई फाइलें दबा ली जाती हैं, जिससे शिक्षक वर्षों तक दौड़ लगाने को मजबूर होते हैं। इन मामलों ने विभागीय लापरवाही और उदासीनता की तस्वीर साफ कर दी है, जहां सम्मान और अधिकार दोनों ही फाइलों में उलझकर रह गए हैं। शिक्षक वीरेंद्र पटेल द्वारा वर्ष 1981 के शासनादेश (जीओ) के आधार पर लाभ मांगा जा रहा है। विभाग की ओर से उसी शासनादेश की प्रति शिक्षक से मांगी गई है। उपलब्ध कराए जाने पर नियमानुसार लाभ दे दिया जाएगा। कुछ कार्रवाई के कारण शिक्षकों का बोनस रोका गया है। -डॉ. अमरकांत सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक।
