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मिथिला की संस्कृति, संस्कार एवं स्वाभिमान देश के हर कोने में है मौजूद, दक्षिण भारत में भी मिथिलाधाम की परंपरा का जीवंत होना गौरव की बात : डा गोपाल जी ठाकुर

चेन्नई में दिखा मिथिला की परम्परा, सांसद का हुआ गर्मजोशी से स्वागत

दरभंगा। मिथिला केवल एक भूगोल ही नहीं है बल्कि एक संस्कार एक परंपरा तथा एक संस्कृति का प्रतीक है। मिथिला क्षेत्र से कई हजार किलोमीटर दूर तमिलनाडु के चेन्नई में जिस तरह से पाग अंगवस्त्र मिथिला पेंटिंग वेद मंत्रो से स्वागत और सम्मान किया गया है वह इस बात को साबित करता है कि देश के हर कोने में मिथिलधाम का स्वाभिमान जीवंत है जो साढ़े आठ करोड़ मिथिलावासियों के लिए गौरव का विषय है। दरभंगा के सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने रेलवे स्टैंडिंग कमेटी के अध्ययन दौरे के दौरान तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई एयरपोर्ट पर वहाँ रह रहे मिथिलावासियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत, सम्मान किए जाने के बाद उपरोक्त उदगार व्यक्त किया। सांसद ने अपने स्वागत और सम्मान को आत्मीयता, अपनत्व का प्रतीक बताते हुए कहा इतनी दूर दक्षिण भारत में भी मिथिला की पाग और चादर से सम्मानित किया जाना यह दर्शाता है कि मिथिला की संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान देश के हर कोने में मजबूती के साथ जीवंत है। प्रवासी मैथिलजनों द्वारा दिए गए इस अपार स्नेह और सम्मान के प्रति आभार प्रकट करते हुए दरभंगा के सांसद, डा ठाकुर ने कहा मिथिला जहाँ भी रहती है, वहा अपनी संस्कृति, राष्ट्रप्रेम की खुशबू फैलाती है ,आज का सम्मान इसका ज्वलंत उदाहरण है। स्वागत, सम्मान करने बालों में चेन्नई के त्यागी बाबा गौ सेवा संस्थान, मिथिला धाम शाखा , मैथिल परिवार चेन्नई के साथ साथ आचार्य राजेश कुमार,पंडित मनोज कुमार झा,अमरनाथ मिश्र,अजय शंकर झा,गोपाल मेहता,योग शिरोरत्न अजय कुमार,डीपी सिंह रामायण, मीनाक्षी झा,अनुराधा शर्मा,पूजा सहितअन्य शामिल थे।

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