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दरभंगा के अदालत ने आज 31 साल पुराने चचित हत्याकांड में क्राइम के चर्चित अधिवक्ता अंबर इमाम हाशमी और उनके भाई कौशर इमाम हाशमी को सुनाया फैसला कोर्ट ने कस्टडी में लेकर भेजा जेल

मवेशी को तालाब में पानी पिलाने आये किसानो पर गोलीबारी में राम कृपाल चौधरी की मौके पर मौत, 9 अन्य हुए थे घायल , दो गांव के बीच था विवाद एक बता रहे थे श्मशान की जमीन तो दूसरा रास्ता

दरभंगा। व्यवहार न्यायालय दरभंगा के तृतीय अपर सत्र एवं न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने क्राइम के चर्चित अधिवक्ता व पूर्व पीपी अधिवक्ता अंबर इमाम हाशमी और उनके भाई कौशर इमाम हाशमी को 31 साल पुराने एक हत्या के मामले कस्टडी में लेते हुए जेल भेज दिया है। बता दें की विशनपुर थाना के हत्याकांड मामले में सुनवाई करते हुए दोषी करार दिया है। मामले में 31 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। घटना 8 अगस्त 1994 की शाम 7 बजे की है ज़ब विशनपुर थाना क्षेत्र के बसंत गांव से सटे गुणसार पोखर के दक्षिणी पूर्वी पोखर भिंडा को लेकर दो गांव में विवाद था। बसंत गांव के लोग इसे श्मशान कहते थे और दावा देते थे जबकी पटोरी गांव के लोग रास्ता बताते थे जिसको लेकर दोनों गांव के बिच विवाद चल रहा था। 8 अगस्त 1994 की शाम पटोरी गांव के राम कृपाल चौधरी,रामपुकार चौधरी समेत एक दर्जन किसान अपनी भैंस चराकर लौटने के क्रम में गुणसार पोखर में अपने भैंस को पानी पिला ही रहे थे।अचानक बसंत गांव से 25 से अधिक लोग फरसा,भाला,बंदूक से लैश होकर सबों को घेरकर उनके मवेशियों को जबरन बसंत गांव ले जाना चाहा। पशुपालकों के द्वारा विरोध करने पर सबों ने बंदूक से अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दिया। जिसमें एक रामकृपाल चौधरी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं बन्दूक की गोली लगने से आधा दर्जन लोग घायल हुए थे।गोलीकांड में पटोरी गांव के मोहन चौधरी, रविंद्र चौधरी, अशोक चौधरी, कैलाश बिहारी चौधरी, संगीत चौधरी, रामपुकार चौधरी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। व्यवहार न्यायालय के लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि जिले के चर्चित हत्याकांड मामले में विशनपुर थाना क्षेत्र के बसंत गॉव निवासी कौशर ईमाम हासमी, अंबर इमाम हाशमी, राजा हासमी, मोबिन हाशमी और अंजार हाशमी को अदालत ने दोषी घोषित किया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने 8 अगस्त 1994 को संस्थित विशनपुर थाना कांड संख्या 58/1994 से बने सत्रवाद सं. 326/99 और सत्रवाद संं 320/10 की सूनवाई पूरी कर उपरोक्त अभियुक्तों को मानव हत्या का दोषी घोषित करते हुए बंधपत्र खंडित कर जेल भेज दिया है। अदालत ने सभी जूर्मियों की सजा अवधि का निर्धारण के बिन्दु पर सूनवाई और निर्णय के लिए 31 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित किया है। इस चर्चित हत्या मामले के ट्रायल में 31 वर्ष बीत गए और 32 वें वर्ष में न्याय दिलाने का निर्णय हुआ है। इस दौरान प्राथमिकी के आधा दर्जन से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं गोली लगने से जख्मी एक युवक की मौत भी हो चुकी है।

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