डेस्क :किसे मिलेगा वोट का अधिकार, कौन जेल से कदम रखेगा बाहर, हम कैसी हवां में सांसे लेंगे और कितनी आजादी के साथ अपनी बातें कह सकेंगे। 2026 की शुरुआत भारत के लिए सिर्फ एक नया कैलेंडर नहीं, बल्कि संवैधानिक परीक्षा का साल है। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित मामलों में मतदाता सूची से जुड़ा विशेष गहन संशोधन सबसे संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है। इस प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिकाएँ यह सवाल उठा रही हैं कि क्या लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित हैं या उन्हें नए सिरे से परिभाषित किया जा रहा है। 2026 में अदालत के फैसले देश की राजनीति और नागरिक स्वतंत्रताओं की दिशा तय करेंगे। दिल्ली दंगे मामले में आरोपियो की जमानत अर्जी पर भी नए साल में फैसला आने वाला है। ऐसे तमाम मामले हैं जिन पर आने वाले साल में सुप्रीम कोर्ट की नजर रहेगी।
