गुवाहाटी। असम के कार्बी आंगलोंग ज़िले में हुई हिंसा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। विधानसभा चुनाव से पहले जनजातीय इलाक़ों में बढ़ती नाराज़गी सियासी चिंता का कारण बनती जा रही है।
छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में हिंसा के दौरान अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक आईपीएस अधिकारी समेत 60 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ीं और सेना को फ़्लैग मार्च करना पड़ा।
विशेषज्ञों के मुताबिक ऊपरी असम के कई समुदाय लंबे समय से सरकार से नाराज़ हैं। छह स्थानीय समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का वादा अब तक पूरा नहीं होने से असंतोष बढ़ा है। कार्बी आंगलोंग की हिंसा ने इस नाराज़गी को और तेज़ कर दिया है, जिससे आगामी चुनावों में बीजेपी की राह आसान नहीं दिख रही।
आशुतोष झा
