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सेहत के साथ स्वाद के संगम से लोकप्रिय हुआ काशी का गुड़

वाराणसी :स्वास्थ्य के लिए लाभकारी गुड़ सर्दियों में विशेष रूप से लोकप्रिय हो गया है। परंपरागत तौर पर गुड़, मूंगफली तथा तिल-गुड़ की पट्टी और लड्डू बाजार में बिकते रहे हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के कारण अब गुड़ के नए उत्पादों का बाजार भी तेजी से बढ़ा है।हाल के वर्षों में गुड़ के साथ विभिन्न सामग्रियों के प्रयोग बढ़े हैं। नारियल, छोटी इलायची, अलसी, सफेद तिल और सोंठ मिलाकर बनाए गए मिश्रण का स्वाद तो बढ़ा ही है, साथ ही यह कई बीमारियों में भी लाभकारी माना जा रहा है। गले में खराश, खांसी-जुकाम में सोंठ और गुड़ का मिश्रण खासा पसंद किया जा रहा है।

कुछ उद्यमी गुड़ में हल्दी और अलसी मिलाकर भी नए प्रयोग कर रहे हैं। अलसी मिश्रित गुड़ को लोग कोलेस्ट्रॉल से बचाव और उपचार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं नारियल और छोटी इलायची वाला गुड़ उत्पाद भी इन दिनों अच्छी मांग में है। सरहरी गांव के कुटीर उद्यमी अर्जुन मौर्या और अवधेश मौर्या के बनाए गए गुड़ के उत्पाद अब देशभर के बाजारों में पहुंच गए हैं। उनके उत्पाद नई दिल्ली, मुंबई सहित अन्य महानगरों के खादी इंडिया स्टोर्स पर उपलब्ध हैं। साल 2017 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत अवधेश मौर्या ने 15 लाख रुपये का ऋण लिया था। आज उनके गुड़ की मांग पूर्वांचल के तमाम शहरों में भी है। उनके कारखाने में आसपास के गांवों की 70 से अधिक महिलाओं और पुरुषों को रोजगार भी मिल रहा है। अवधेश मौर्या कहते हैं, सर्दियों में गुड़ और सोंठ की अच्छी मांग होती है। जो लोग चीनी खाना पसंद नहीं करते, वे गुड़ को प्राथमिकता दे रहे हैं। कोरोना काल के बाद से गुड़ की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में पूर्वांचल के गांवों में गुड़ के कारखाने अधिक खुले हैं। गुड़ में आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स गुड़ में आयरन और कार्बोहाइड्रेट्स पाए जाते हैं, जिससे तुरंत ऊर्जा मिलती है। यह पाचन तंत्र और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और खून को साफ करने में भी कारगर है।

 

 

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