लखनऊ:उत्तर प्रदेश सरकार ने समाज के सबसे कमजोर वर्ग निराश्रित और असहाय बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए स्पॉन्सरशिप योजना को प्रभावी रूप से लागू किया है, जिससे आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित होने और बाल मजदूरी या भिक्षावृत्ति में फंसने का खतरा कम किया जा सके।
बच्चों को परिवार से अलग किए बिना मदद
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बच्चों को संस्थानों में भेजने के बजाय, उन्हें उनके परिवार और सामाजिक परिवेश में ही सहारा दिया जाता है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना बच्चों को अपने घर में रहकर पढ़ाई और बेहतर जीवन जीने का अवसर देती है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़े रह सकें।
कौन-कौन से बच्चे होंगे पात्र
स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ उन बच्चों को दिया जाएगा जो कठिन और संवेदनशील परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। इनमें शामिल हैं-जिनके पिता का निधन हो चुका हो
जिनकी मां तलाकशुदा या परिवार द्वारा परित्यक्त हो
बेघर, अनाथ या प्राकृतिक आपदा से प्रभावित बच्चे
जिनके माता-पिता या उनमें से कोई एक गंभीर या जानलेवा बीमारी से पीड़ित हो
इसके अलावा बाल मजदूरी, बाल भिक्षावृत्ति, बाल तस्करी, बाल विवाह, शोषण या प्रताड़ना का शिकार, दिव्यांग, घर से भागे हुए, या जिनके माता-पिता जेल में हों, ऐसे बच्चों को भी योजना के दायरे में रखा गया है। एचआईवी प्रभावित या ऐसे परिवारों के बच्चे, जहां माता-पिता शारीरिक, मानसिक या आर्थिक रूप से देखभाल करने में असमर्थ हों, वे भी इस योजना के पात्र है।
आर्थिक सहायता से शिक्षा को मिलेगा सहारा
योजना के तहत पात्र बच्चों को ₹4,000 प्रति माह की सहायता दी जाएगी, जिससे उनकी शिक्षा, पोषण और दैनिक जरूरतें पूरी हो सकें। इसके लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा भी तय की गई है-ग्रामीण क्षेत्रों में ₹72,000 और शहरी क्षेत्रों में ₹96,000 तक की आय वाले परिवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
भविष्य निर्माण की दिशा में मजबूत कदम :यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को सम्मानजनक जीवन, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देने का माध्यम है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा सिर्फ गरीबी या पारिवारिक मजबूरी के कारण अपने सपनों से समझौता न करे।
