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दानवीर महाराजधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह की 118वीं जयंती पर रामबाग पैलेस में भव्य आयोजन, जनसेवा के कार्यों से दी गई सच्ची श्रद्धांजलि महाराजा को मिले भारत रत्न 

दरभंगा। मिथिला के गौरव और दरभंगा राज के अंतिम शासक, महाराजधिराज सर डॉ. कामेश्वर सिंह की 118वीं जयंती रामबाग पैलेस में पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके परोपकारी स्वभाव के अनुरूप समाज सेवा के कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। भावभीनी श्रद्धांजलि और पुष्पांजलि कार्यक्रम की शुरुआत महाराजधिराज के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन दरभंगा इंजिनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य संदीप तिवारी जी के द्वारा किया गया । रामबाग परिसर में आयोजित इस समारोह में पधारे डॉ संदीप तिवार जी,डॉ शिला साहू, डॉ लाल मोहन झा, डॉ हेमपति झा एवं डॉ अशोक कुमार प्रसाद ने मंच से महाराजधिराज के कृतित्व और व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य , दानशीलता एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान की चर्चा की। महाराजा कामेश्वर सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट में लगा विशाल स्वास्थ्य शिविर जयंती के अवसर पर महाराजा कामेश्वर सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी कुमार राजेश्वर सिंह एवं कुमार कपिलेश्वर सिंह जी द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में प्रसिद्ध चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। सैकड़ों मरीजों का मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उन्हें उचित परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों के बीच मुफ्त दवाओं का वितरण भी सुनिश्चित किया गया। ट्रस्ट के आयोजकों का कहना था कि महाराजधिराज हमेशा से स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर संवेदनशील थे, और यह शिविर उन्हीं के सपनों को आगे ले जाने का एक प्रयास है। 645 जरूरतमंदों के बीच हुआ कम्बल वितरण सर्दी की आहट को देखते हुए मानवता की सेवा की मिसाल पेश की गई। दरभंगा राज परिवार के कुमार राजेश्वर सिंह एवं कुमार कपिलेश्वर सिंह द्वारा समाज के जरूरतमंद लोगों के बीच कम्बल वितरण किया गया। कुमार कपिलेश्वर सिंग ने कहा समाज सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवता का सर्वोच्च धर्म है। दूसरों की मदद करके ही हम एक सशक्त और संवेदनशील राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। महाराजधिराज का पूरा जीवन ही दान और दया के लिए समर्पित था। उनके जन्मदिन पर लोगों की मदद करने से बेहतर कोई उत्सव नहीं हो सकता। इस आयोजन में उनके योगदान को देखते हुए भारत रत्न की मांग उठाई गई है, क्योंकि उन्होंने देश और समाज के लिए कई असाधारण कार्य किए शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान रहा उन्होंने दरभंगा मेडिकल कॉलेज, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ,दरभंगा एयरपोर्ट, मिथिला शोध संस्थान, बनारस हिंदू विश्विद्यालय, दरभंगा संग्रहालय,सहित कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों को बड़ी मात्रा में दान दिया और उनकी स्थापना में सहयोग किया। उन्हें उनकी अपार दानशीलता के लिए जाना जाता है। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वायु सेना को लड़ाकू विमान तक दान किए थे। वह संविधान सभा के सदस्य रहे , मैथिल महासभा के अध्यक्ष,हिन्दू महासभा के अध्यक्ष, एवं आज़ादी के बाद दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे (1952-58 और 1960-62)। उन्होंने चीनी मिलों, जूट मिलों, प्रेस (जैसे ‘द इंडियन नेशन’ और ‘आर्यावर्त’ समाचार पत्र), और ‘दरभंगा एविएशन’ जैसी एयरलाइंस सहित 14 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को नियंत्रित किया, जिससे बड़े पैमाने पर रोज़गार उत्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में राज दरभंगा के प्रबंधक आशुतोष दत्ता, ट्रस्ट के सह सचिव अमरकांत झा, रमेश झा, रंगनाथ ठाकुर,ठाकुर भूपेंद्र किशोर, सुजीत मल्लिक, प्रदीप गुप्ता, वार्ड 12 पार्षद मुकेश महासेठ, वार्ड 11 पार्षद सोनी पूर्व, सपना भारती, सुजीत मल्लिक, उत्सव पाराशर, डॉ प्रशांत सेतु,राम कृष्ण लाल दास,बबलू, संतोष सिंह, जितेंद्र ठाकुर, अशोक मंडल, राजू मंडल, सुनील रॉय,मंच संचालन राजीव प्रकाश मधुकर ने किया स्वागतभाषण प्रियांशु झा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ संतोष कुमार ने किया।

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