बिहार चुनाव में कांग्रेस का क्या हाल हुआ, सबने देखा. कुल जमा 6 विधायक जीते. नीतीश कुमार के फिर से शपथ ग्रहण करने से पहले मीडिया में चर्चा शुरू हो गई कि वे 6 जेडीयू में जाने वाले हैं.फिलहाल अटकलें हैं लेकिन अगर ऐसा कुछ होता है तो बिहार ‘कांग्रेस मुक्त’ हो सकता है. पिछली बार ओवैसी के विधायकों ने कुछ ऐसा ही खेला किया था. इधर, यूपी में अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति में जुटी सपा बाकायदे लेंस लेकर नतीजा पढ़ रही है. बात अखिलेश यादव तक पहुंचाई गई है. पार्टी के भीतर एक बड़े गुट का मानना है कि बस बहुत हुआ, 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के साथ गठबंधन पर फिर से विचार करने का समय आ गया है.सपा के नेताओं की कोर टीम ने अखिलेश यादव को मैसेज पहुंचा दिया है कि बिहार की तरह के हालात न बने, इससे बचने के लिए बहुत पहले ही सीट शेयरिंग पर स्थिति साफ करनी होगी. अगर गठबंधन चलाना भी है तो कांग्रेस को याद दिलाना होगा कि सीटें मांगने से पहले जीतने की संभावना को जरूर ध्यान में रखें. साफ है कि सपा आलाकमान अलर्ट है. इसी तरह कांग्रेस के दूसरे सहयोगी भी सोच रहे होंगे.
महाराष्ट्र में उथल-पुथल :महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा पर उद्धव ठाकरे की टीम ने कांग्रेस को जमकर सुनाया है. यहां तक कह दिया कि भाजपा की लहर में ऐसा डूबोगे कि पता भी नहीं चलेगा. यह दिखाता है कि कांग्रेस की स्थिति को देखकर सहयोगी अब उससे दूरी बनाने लगे हैं. आधिकारिक घोषणा भले ही न हुई हो लेकिन आगे कांग्रेस की बारगेनिंग पावर शून्य रहने वाली है.बिहार में कांग्रेस ने कुल 61 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इस पर भी वो संतुष्ट नहीं दिख रही थी. उसे और सीटें चाहिए थीं लेकिन केवल 6 सीटें ही जीत पाई. अब यूपी में इसका असर दिख सकता है. पिछले लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठजोड़ ने भाजपा को तगड़ा झटका दिया था लेकिन उसमें सपा का रोल ज्यादा माना गया. सपा ने 37 सीटें जीतीं और उसके सपोर्ट के चलते कांग्रेस 17 में से 6 सीटें निकालने में सफल रही. इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन बुरी तरह फेल रहा था.
जरा याद कीजिए जब बिहार चुनाव में कांग्रेस की तरफ से तेजस्वी यादव को सीएम कैंडिडेट प्रोजेक्ट किया गया था तो अखिलेश यादव ने खुलकर बधाई दी थी. उन्होंने कहा था कि मैं बधाई देना चाहता हूं INDIA गठबंधन और कांग्रेस पार्टी के नेताओं को जिन्होंने तय किया है कि तेजस्वी के ही नेतृत्व में चुनाव होगा. इससे पहले फरवरी में संसद में खड़े होकर अखिलेश यादव ने कहा था कि हम कांग्रेस के साथ हैं. जातीय जनगणना की बात पर कहा था कि कोई तकरार नहीं है.बिहार में तो अखिलेश ने आरजेडी और कांग्रेस के गठबंधन के लिए प्रचार भी किया था लेकिन जब बात यूपी की आएगी तो वह जरूर गौर करेंगे. चर्चा उनकी पार्टी से ही शुरू हुई है.
