बांग्लादेश शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाई गई है। उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में सुनवाई के दौरान उन्हें दोषी पाया गया।शेख हसीना की गैरमौजूदगी में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री देश छोड़ने के बाद से ही भारत में मौजूद हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया था। यह मुकदमा पिछले साल छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के लिए है। वहीं, बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराध के लिए पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा सुनाई। सजा की सुनवाई के दौरान बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी है। इसके चलते यूनुस सरकार अलर्ट पर हैl
जज ने क्या कहा :जज गुलाम मुर्तजा मजूमदार ने एक भीड़ भरी अदालत में शेख हसीना के खिलाफ फैसला सुनाया। जैसे ही उन्होंने अपना फैसला पढ़कर खत्म किया, अदालत में मौजूद लोग खुशी मनाने लगे। उन्होंने कहा कि आरोपियों के लिए मौत की सजा तय करते हुए कहा कि इन सभी को मानवता के खिलाफ सजा सुनाने के लिए पर्याप्त वजहें हैं। इस फैसले का राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारण किया गया।न्यायाधिकरण ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के यह साबित कर दिया है कि पिछले साल 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर घातक कार्रवाई के पीछे हसीना का ही हाथ था।बता दें कि जुलाई 2024 में आर्थिक तंगी, भ्रष्टाचार और रोजगार संकट से उपजे छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। पांच अगस्त को वह भारत चली गईं और बांग्लादेश में यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली। बाद में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए। अनुमान है कि बांग्लादेश में फरवरी 2026 में नई सरकार के लिए चुनाव हो सकता है।संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने कहा है कि हसीना और उनकी सरकार ने सत्ता बनाए रखने के प्रयास में प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर व्यवस्थित रूप से घातक बल का प्रयोग किया। इसमें लगभग 1,400 लोग मारे गए। शेख हसीना ने मुकदमे में शामिल होने के लिए भारत से लौटने से इनकार कर दिया है। साथ ही उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है कि उन्होंने भागने से पहले के हफ्तों में सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।
