डेस्क :बिहार की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंची है, जहां मतदाता ने अपनी पसंद को अभूतपूर्व स्पष्टता, दृढ़ता और राजनीतिक परिपक्वता के साथ दर्ज किया है। 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव सामान्य जनादेश नहीं बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश है, जहां नीतीश कुमार के सुशासन ने अविश्वास को पछाड़ दिया, स्थिरता ने प्रयोगधर्मिता को और सामाजिक सुरक्षा ने जातीय ध्रुवीकरण को दृढ़ता से मात दे दी। बिहार का यह जनादेश बताता है कि बिहार का मतदाता भावनात्मक राजनीति, जातिगत उत्तेजना और चुनावी वादों की चमक-दमक से परे निकल चुका है और वह केवल उसी नेतृत्व को स्वीकार करता है, जो उसके जीवन में वास्तविक बदलाव लाए, सुरक्षा दे, भरोसा कायम रखे और विकास को धरातल पर उतारे। इसी कसौटी पर यह समझना कठिन नहीं कि एनडीए को ऐतिहासिक जीत क्यों मिली और महागठबंधन क्यों धराशायी हो गया।
