डेस्क :वर्ष 2000 समय और सदी के साथ ही बिहार की राजनीति भी नई करवट ले रही थी। । लालू राज के 10 वर्ष पूरे हो गए थे। नीतीश और जॉर्ज फर्नांडिस की समता पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हो चुकी थी और केंद्र में काबिज थी वाजपेई सरकार जो अब से 1 वर्ष पहले ही सत्ता में आई थी। और अब बारी थी बिहार के 12वें विधानसभा चुनाव की। अब पहले से जो लालू यादव अपने ठेट अंदाज और जमीनी राजनीति के लिए जाने पहचाने जाते थे इस समय तक 940 करोड़ के चारा घोटाले के लिए बेहद बदनाम हो चुके थे और इसी कारण लालू प्रसाद यादव को इस्तीफा भी देना पड़ा और सत्ता की गमान उनकी पत्नी राबड़ी देवी के हाथों में सौंप दी गई थी। राज्य की घटती तरक्की और बढ़ते अपराध दर ने लालू राबड़ी सरकार को जंगल राज का तमख दे दिया था। विपक्षी दल एनडीए के लिए भी यह सबसे बड़ा मुद्दा था और 2000 का विधानसभा चुनाव इसी मुद्दे के बल पर लड़ा गया। उम्मीद यह लगाई गई कि जनता जंगल राज साफ कर देगी।
