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विख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, 91 साल की उम्र में वाराणसी में ली अंतिम सांस

डेस्क : भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत ने आज एक अनमोल सितारा खो दिया है. देश के दिग्गज शास्त्रीय गायक और ठुमरी सम्राट पंडित छन्नूलाल मिश्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उन्होंने दशहरे के दिन वाराणसी में अंतिम सांस ली. लंबे समय से वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे.

बताया गया कि किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं और अन्य पुरानी बीमारियों के कारण उनकी हालत बिगड़ती चली गई. उनके निधन से न केवल संगीत जगत बल्कि पूरे देश में शोक की लहर है. पंडित छन्नूलाल मिश्र भारतीय शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय संगीत के उन महानायकों में से एक थे, जिनकी ठुमरी, चैती, कजरी और भक्ति गीतों की गायकी ने श्रोताओं को हमेशा बांधे रखा. उनकी गहरी और प्रभावशाली आवाज ने उन्हें संगीत जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई.

संगीत के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए पंडित छन्नूलाल मिश्र को कई बड़े सम्मान प्राप्त हुए. वर्ष 2010 में उन्हें पद्म भूषण और 2020 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनकी कला के प्रति समर्पण और भारतीय शास्त्रीय संगीत की सेवा का प्रमाण है. पिछले सात महीनों से वे लगातार अस्वस्थ चल रहे थे. टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और श्वसन संबंधी दिक्कतों ने उन्हें काफी कमजोर कर दिया था.

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ. उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता पंडित बद्री प्रसाद मिश्र से प्राप्त की. इसके बाद किराना घराने के उस्ताद अब्दुल ग़नी खान से खयाल गायन की शिक्षा ली. धीरे-धीरे उन्होंने बनारस घराने की गायकी की परंपरा को आगे बढ़ाया.

बनारस घराना ठुमरी, चैती, कजरी और पूर्वांग शैली की गायकी के लिए जाना जाता है और पंडित मिश्र इसकी एक सशक्त कड़ी माने जाते हैं. उनकी प्रस्तुतियों में भावनाओं की गहराई और स्वर की शक्ति हमेशा श्रोताओं को मोहित करती थी. उनके लोकप्रिय एल्बम राग विराट और ठुमरी महफिल आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं.

पंडित छन्नूलाल मिश्र का संबंध केवल संगीत तक सीमित नहीं था. 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़े थे, तब छन्नूलाल मिश्र उनके प्रस्तावक बने थे. धर्म नगरी काशी को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया और जीवनभर यहीं से संगीत साधना करते रहे.

वह तबला वादक पंडित अनोखेलाल मिश्र के दामाद थे और उनके पुत्र रामकुमार मिश्र भी प्रसिद्ध तबला वादक हैं. इस प्रकार उनका परिवार भी संगीत की विरासत को आगे बढ़ा रहा है.

पंडित छन्नूलाल मिश्र ने बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी आवाज दी. उनकी गायकी ने फिल्मों में शास्त्रीय संगीत का रंग भरा और युवाओं को भारतीय संगीत की परंपरा से जोड़ने का काम किया.

पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन शास्त्रीय संगीत की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने न केवल संगीत साधना की, बल्कि पीढ़ियों को प्रेरित किया. उनकी ठुमरी, भजन और राग आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजते रहेंगे. उनका जाना भारतीय संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है.

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