डेस्क :राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत का चरित्र सेवाभाव में निहित है और यही भावना आज की महाशक्तियों की तरह बनने के बजाय तटस्थ भाव से विश्व की सेवा करने में उसका मार्गदर्शक सिद्धांत साबित होगीउन्होंने खेद व्यक्त किया कि विज्ञान व ज्ञान के अन्य क्षेत्रों में प्रगति औरमनुष्यों के पास सब कुछ होने के बावजूद, दुनिया में अब भी झगड़े जारी हैं। भागवत ने कहा कि भारत दुनिया को एक नया रास्ता दिखाएगा। दुनिया इसे गुरु कहेगी, वहीं भारत उन्हें मित्र कहेगा। वह नागपुर में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित कार्यक्रम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग महा रुद्र पूजा में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे
