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दरभंगा : संत कुमार नाथानी दुनिया से जाते-जाते दो लोगों की जिंदगी में कर गए उजाला

दरभंगा (नासिर हुसैन)। मौत काफी दुखदाई होती है, परंतु कुछ मौतें ऐसी भी होती हैं जो यादगार हो जाती हैं। साथ ही, दूसरों के लिए प्रेरणादायक बन जाती हैं। लहेरियासराय स्थित बाकरगंज निवासी वस्त्र व्यवसाई संत कुमार नाथानी (88 वर्ष) का नाम भी इसमें जुड़ गया।
उन्होंने कल गुरुवार को एक निजी अस्पताल में  अंतिम श्वास लिया। उनके स्वर्गवास के तुरंत पश्चात परिजनों ने उनकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय डीएमसीएच के आई बैंक को उनकी आंखों का महत्वपूर्ण हिस्सा, जिसे ‘कॉर्निया’ कहते हैं, का दान किया। डीएमसीएच के आई बैंक के डॉ. अनुनय के नेतृत्व में डॉ. शैलजा, डॉ. माधुरी, सिस्टर पूनम, सिस्टर गीता, एवं सिस्टर आरती की टीम ने नेत्रदान की प्रक्रिया संपूर्ण की एवं मौके पर ही नेत्रदान का प्रमाण-पत्र परिजनों को प्रदान किया।

मृतक के पुत्रों दिलीप एवं श्याम नाथानी ने कहा कि उन्हें इस बात की काफी संतुष्टि है कि अब उनके पिता की आंखों से दो नेत्रहीनों को फिर से देखने का मौका मिलेगा। पुत्रियों अन्नू लोहिया, रानी जाजोदिया, गौरी जाजोदिया एवं प्रिया माखड़िया ने कहा कि अब उनके पिता इस दुनिया में एक नहीं, दो शरीर में विद्यमान रहकर ईश्वर की बनाई प्रकृति को निहार सकेंगे।
मौके पर व्यवसाई बनवारी लाल सरावगी, जिन्होंने कुछ दिनों पूर्व ही अपनी माता के निधन के उपरांत उनका नेत्रदान कराया था, ने कहा कि समाज में अब इस बात की जागरूकता आई है, लोग मरने के पश्चात अपने परिजनों के कॉर्निया का दान कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप एक नहीं, दो-दो लोगों को फिर से दुनिया देखने का मौका मिल पा रहा है।

दधीचि देहदान समिति दरभंगा के अध्यक्ष एवं भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव मनमोहन सरावगी ने बताया कि डीएमसीएच में 16 वां नेत्रदान है और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मौके पर उपस्थित दरभंगा के प्रसिद्ध व्यवसायी एवं मृतक के दामाद सुशील लोहिया, जिन्होंने 4 वर्ष पूर्व कोलकाता में अपनी माता के निधन उपरांत वहीं के आई बैंक में उनका नेत्रदान किया था, ने बताया कि मिथिला हमेशा से दानवीरों की भूमि रही है, इसी क्रम में दानवीरों की लिस्ट में उनके पूज्य ससुर जी का नाम भी जुड़ गया है। पवन कुमार मित्तल ने आह्वान किया कि मृत्युपरांत हमें अपने परिजनों का नेत्रदान आवश्यक रूप से करना चाहिए, जिससे कि किसी की अंधियारी दुनिया में फिर से उजाला हो सके। दधीचि देहदान समिति दरभंगा के डॉ. कुमार आनंद, डॉ. बलजीत सिंह, कुमार आदर्श, उमेश प्रसाद, डॉ. आशीष शेखर एवं समाज के अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने परिवारजनों को ढांढस बंधाया। आज 5 जुलाई को मृतक के बड़े पुत्र दिलीप नाथानी ने एकंमी घाट स्थित श्मशान में पूरे वैदिक रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया।

मनमोहन सरावगी ने बताया कि मृत्यु तो सुनिश्चित है, जो आए हैं उन्हें जाना भी है, अगर ऐसे में कोई अपने मृतक परिजन का नेत्रदान करना चाहते हैं तो उन्हें उनके मोबाइल संख्या 943121 9884 पर खबर कर नेत्रदान हेतु कह सकते हैं। आई बैंक की टीम मृतक के आवास पर ही जाकर आँखों की ऊपरी पारदर्शी झिल्ली, जिसे कॉर्निया के नाम से जाना जाता है, का दान लेती है। उन्होंने कहा नेत्रदान प्राण छूटने के 6 घंटे के भीतर हो जाना चाहिए।

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