डेस्क: बांग्लादेश (Bangladesh) में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कपड़ा कारखानों के कर्मचारियों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। गुरुवार को कई औद्योगिक क्षेत्रों (industrial areas) में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। झड़पों में दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है।
राजधानी ढाका में कई दिनों से जारी प्रदर्शन अब आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया है। ढाका के बाहरी इलाके नारायणगंज जिले के फतुल्लाह में कर्मचारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई। बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक ‘प्रथम आलो’ के अनुसार, पुलिस ने यहां कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया है।
ढाका के पास सावर के अशुलिया औद्योगिक क्षेत्र में करीब 100 कारखाने बंद हैं। अशुलिया औद्योगिक पुलिस के अधीक्षक मोमिनुल इस्लाम भुइयां ने बताया कि स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, एक अन्य प्रमुख औद्योगिक केंद्र गाजीपुर जिले में कर्मचारियों ने एक प्रमुख राजमार्ग जाम कर दिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त माहिदुल इस्लाम के मुताबिक, प्रदर्शनों के केंद्र बने ढाका के मीरपुर इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग
सरकार ने कर्मचारियों की वेतन वृद्धि की मांग पर विचार करने के लिए नए वेतन बोर्ड का गठन किया है। बोर्ड के अध्यक्ष सैयद आजाद सुब्हानी ने कहा है कि नए वेतनमान के तहत कर्मचारियों को जनवरी में पहला वेतन मिलेगा। हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद प्रदर्शन थम नहीं रहे हैं।
कर्मचारी न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका (करीब 245 डॉलर) करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण उनकी क्रय शक्ति में भारी गिरावट आई है। बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में करीब 40 लाख लोग कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं हैं।
निर्यात उद्योग पर पड़ रहा असर
प्रदर्शनों के कारण देश के कपड़ा उद्योग का कामकाज प्रभावित हुआ है और सैकड़ों कारखाने बंद हैं। बांग्लादेश में करीब 2,500 कपड़ा कारखाने हैं। यह उद्योग देश के लिए निर्यात राजस्व का प्रमुख स्रोत है और इससे सालाना चार अरब डॉलर से अधिक की आय होती है।


