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Gold loan मार्केट में बढ़ा दबाव, 5 महीने में दोगुना हुआ फंसे कर्ज का आंकड़ा, ₹22.5 लाख करोड़ तक पहुंचा बाजार

डेस्क: भारत में गोल्ड लोन मार्केट ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार किया है लेकिन अब इस सेक्टर में कर्ज चुकाने को लेकर दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। ट्रांसयूनियन सिबिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 90 दिनों से ज्यादा समय से बकाया कर्ज का अनुपात मार्च के 0.15 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 0.30 फीसदी हो गया है यानी महज पांच महीनों में इसमें दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में गोल्ड लोन का कुल एसेट बेस तीन गुना बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। देश में हर पांच में से एक क्रेडिट एक्टिव व्यक्ति गोल्ड लोन चुका रहा है। इससे साफ है कि भारतीय परिवारों के लिए सोने के बदले कर्ज लेना एक अहम वित्तीय विकल्प बनता जा रहा है। हालांकि, बकाया कर्ज में बढ़ोतरी इस सेक्टर के लिए चिंता का विषय है।
कम हुए लोन लेकिन बढ़ गई कर्ज की रकम
गोल्ड लोन बाजार में कर्ज लेने के तौर-तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल लोन डिस्बर्समेंट में सालाना आधार पर 15 फीसदी की गिरावट आई है। इसके साथ ही नए लोन लेने वाले ग्राहकों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है।
इसके बावजूद मंजूर किए जाने वाले लोन की औसत रकम बढ़ रही है। सैंक्शन किए गए लोन की राशि में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है। खास बात यह है कि 2.5 लाख रुपए से ज्यादा के गोल्ड लोन की मांग जून तिमाही में 19 फीसदी बढ़ी है। इसके चलते उद्योग में औसत लोन टिकट साइज बढ़कर 4.1 लाख रुपए हो गया है।
सरकारी बैंकों की गोल्ड लोन बाजार में बढ़ी हिस्सेदारी
गोल्ड लोन सेक्टर में पिछले तीन वर्षों से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की मजबूत पकड़ रही है। हालांकि, अब सरकारी बैंक भी इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल गोल्ड लोन डिस्बर्समेंट वॉल्यूम में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 37 फीसदी हो गई है। वहीं, लोन की कुल वैल्यू के आधार पर सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी लगभग आधे बाजार तक पहुंच गई है।
इससे संकेत मिलता है कि गोल्ड लोन कारोबार में पारंपरिक बैंकिंग संस्थानों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
मौजूदा ग्राहकों पर बढ़ रही कर्ज की निर्भरता
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि गोल्ड लोन बाजार की हालिया ग्रोथ नए ग्राहकों के जुड़ने के बजाय मौजूदा उधारकर्ताओं द्वारा बार-बार कर्ज लेने और ज्यादा रकम के लोन लेने से आ रही है।
इसका मतलब है कि लोग अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से ज्यादा सोने पर निर्भर हो रहे हैं। हालांकि, बड़े लोन और बार-बार उधारी लेने के साथ कर्ज चुकाने की क्षमता पर भी नजर रखना जरूरी हो गया है।

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