डेस्क: सुपरस्टार बनने के बाद अपनी पहचान से बाहर निकलकर कुछ नया करने का जोखिम कम ही कलाकार उठाते हैं। यश ने हालांकि अपने करियर में बार-बार इस सोच को चुनौती दी है। ‘KGF’ फ्रेंचाइजी से देशभर में लोकप्रियता हासिल करने वाले अभिनेता अब फिल्म ‘रामायण’ में रावण के किरदार के जरिए एक बिल्कुल अलग अंदाज में दर्शकों के सामने हैं। खास बात यह है कि इस बार उनकी भूमिका केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि बतौर को-प्रोड्यूसर भी वह इस बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। ऐसे में यश का यह नया सफर उनके स्टारडम के साथ उनकी रचनात्मक महत्वाकांक्षा को भी दर्शाता है।
रॉकी भाई के किरदार ने यश को पैन इंडिया स्तर पर एक खास पहचान दिलाई। इस भूमिका की लोकप्रियता इतनी ज्यादा रही कि उनके अगले प्रोजेक्ट से दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गईं। ऐसे में ‘रामायण’ में रावण की भूमिका चुनना उनके लिए आसान फैसला नहीं रहा होगा। रॉकी भाई की आक्रामक और लोकप्रिय छवि से निकलकर पौराणिक कथाओं के एक जटिल चरित्र को निभाना अपने आप में बड़ी चुनौती है। यश ने इस चुनौती को स्वीकार कर यह साफ कर दिया है कि वह एक ही तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहते।
फिल्म में रावण के रूप में यश का अंदाज काफी प्रभावशाली नजर आता है। उनकी कद-काठी, चेहरे के भाव और किरदार के अनुरूप बॉडी लैंग्वेज रावण की विशाल छवि को पर्दे पर स्थापित करने में मदद करती है। रावण का व्यक्तित्व केवल उसकी ताकत और युद्ध कौशल तक सीमित नहीं था। वह विद्वान होने के साथ महान तपस्वी, कुशल शासक और महत्वाकांक्षी योद्धा भी था। वहीं उसका अहंकार और सत्ता के प्रति मोह उसके चरित्र को और पेचीदा बनाते हैं। ऐसे किरदार को निभाने के लिए सिर्फ भव्य लुक अपनाना काफी नहीं, बल्कि उसके अलग-अलग स्वभाव को समझना भी जरूरी है।
यश के अभिनय में रावण के व्यक्तित्व के कई रंग देखने को मिलते हैं। कहीं वह तपस्वी और गंभीर नजर आते हैं, तो कहीं अपनी शक्ति और साम्राज्य पर गर्व करने वाले लंकापति के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म में दस सिरों वाले रावण का दृश्य भी खास है, जो इस पात्र की भव्यता और उसके व्यक्तित्व की जटिलता को सामने लाता है। जटायू के साथ टकराव, इंद्र से जुड़ा प्रसंग और कुबेर के साथ संघर्ष जैसे दृश्यों में भी यश अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस से ध्यान खींचते हैं। इन सीन्स में उनका अंदाज रावण को सिर्फ एक खलनायक के बजाय एक प्रभावशाली और विशाल व्यक्तित्व वाले किरदार के रूप में पेश करता है।
अभिनेता से आगे बढ़कर प्रोड्यूसर के रूप में भी यश की बड़ी भूमिका
यश की ‘रामायण’ से जुड़ाव की एक और खास बात उनका बतौर को-प्रोड्यूसर इस प्रोजेक्ट में शामिल होना है। नमित मल्होत्रा के साथ उनकी साझेदारी दिखाती है कि वह अब सिर्फ कैमरे के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराने तक सीमित नहीं हैं। वह फिल्म निर्माण की प्रक्रिया और भारतीय कहानियों को बड़े स्तर पर पेश करने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यश का यह कदम उनके लंबे समय के सिनेमाई नजरिए की ओर इशारा करता है। वह ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहते हैं, जिनकी कहानी और प्रस्तुति देश की सीमाओं से आगे तक पहुंचे। भारतीय पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों के सामने लाने की कोशिश इसी सोच का हिस्सा मानी जा सकती है। इस लिहाज से ‘रामायण’ यश के लिए सिर्फ एक बड़ी फिल्म नहीं, बल्कि अभिनेता और निर्माता दोनों रूपों में अपनी क्षमता दिखाने का अहम मौका भी है।


