डेस्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव (US Midterm Elections) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने ईरान युद्ध (Iran War) जल्द समाप्त होने की उम्मीद बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) एक ही दिन में करीब 10 प्रतिशत तक टूट गया।
कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 93.22 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह पिछले करीब दो महीने का सबसे निचला स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI भी 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया। इस गिरावट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर के आसपास पहुंच गई।
तेल की कीमतों में आई इस नरमी को भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल और ईंधन की लागत पर दबाव बढ़ता है। मौजूदा गिरावट से फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी का खतरा कम होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में बदलाव कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
अमेरिका में चुनावी नतीजों के बाद ईरान युद्ध और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान युद्ध और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी ने रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर, सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने संघर्ष समाप्त करने का वादा किया है। ईरान से जुड़ा यह युद्ध अब नौवें महीने में प्रवेश कर चुका है।
अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर नए हमलों की धमकी दिए जाने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत छह महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी। उस समय क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं पैदा कर दी थीं। हालांकि, मिडटर्म चुनाव के दौरान ट्रंप ने कहा कि फिलहाल ईरान पर हमले तेज करने की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि युद्ध को लेकर लोगों की नाराजगी का असर उनकी पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा है।
इस बीच फारस की खाड़ी से कच्चे तेल का निर्यात फिर बढ़ने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बावजूद मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति में सुधार ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति अभी भी प्रभावित बनी हुई है। इसका मतलब है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद तैयार ईंधन के बाजार में चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
दूसरी ओर, रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के बढ़ते हमलों ने पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। इससे रिफाइंड ईंधन की कीमतों में तेजी बनी हुई है। कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के बाजार में इस समय अलग-अलग परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं।
अमेरिका में ईंधन भंडार की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। वहां कच्चे तेल का स्टॉक लगातार पांचवें सप्ताह घटा है। इसके साथ ही डीजल और अन्य डिस्टिलेट ईंधनों का भंडार 100 मिलियन बैरल से नीचे पहुंच गया है। यह 2003 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
इस प्रकार, ट्रंप की पार्टी की चुनावी हार, ईरान युद्ध को लेकर बदलते राजनीतिक संकेत और मध्य पूर्व से बढ़ते तेल निर्यात ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नीचे खींचा है। हालांकि, रिफाइंड ईंधनों की सीमित आपूर्ति और घटते भंडार के कारण ऊर्जा बाजार की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।


