डेस्क: दीवाली से ठीक 10 दिन पहले भारतीय सर्राफा और कमोडिटी बाजारों में हलचल बढ़ गई है। त्योहारों के इस सीजन में जहां आमतौर पर खरीदारी बढ़ने से कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, वहीं आज यानी 29 अक्टूबर को सोने और चांदी दोनों के भाव में अचानक नरमी दर्ज की गई। वायदा बाजार से लेकर स्थानीय सर्राफा बाजार तक बिकवाली का माहौल बना रहा, जिससे त्योहारों की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को राहत तो मिली है लेकिन निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एम. सी. एक्स. (एमसीएक्स) पर कारोबार शुरू होते ही कीमतों पर दबाव साफ दिखने लगा था। दिसंबर का गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर, चांदी ने इससे कहीं ज्यादा गहरा गोता लगाया।
दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स 1.18 फीसदी टूटकर 1.92 लाख रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गया। यदि इन आंकड़ों की तुलना की जाए, तो चांदी में आई यह गिरावट सोने के मुकाबले 4 गुना से भी ज्यादा रही। जिन ट्रेडर्स ने चांदी में बड़ा दांव लगाया था, उनके लिए यह कारोबारी सत्र काफी भारी साबित हुआ।
मिडिल ईस्ट में तनाव, अमरीका में बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर सोने पर पड़ रहा है। आज करवा चौथ (29 अक्तूबर) के दिन भी सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 782 रुपये गिरकर 1,42,968 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
सोना 500 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 3000 रुपये प्रति किलो टूटी
स्थानीय हाजिर बाजार की बात करें तो नई दिल्ली के सर्राफा बाजार में भी आज ऐसा ही रुख देखने को मिला। त्योहारों के ठीक बाद हाजिर बाजार में मांग में थोड़ी सुस्ती आई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी कोई मजबूत संकेत नहीं मिले हैं। इस कारण दिल्ली के हाजिर बाजार में सोने का भाव 500 रुपये प्रति 10 ग्राम घटकर 1,46,500 रुपए पर आ गया। वहीं चांदी की कीमतों में भारी बिकवाली हुई और यह 3,000 रुपए प्रति किलोग्राम तक टूटकर 1,98,000 रुपए के स्तर पर बंद हुई।
बाजार में अनिश्चितता के कारण आई गिरावट
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की यह तेज फिसलन इसके दोहरे स्वभाव के कारण हुई है। चांदी सिर्फ आभूषण या निवेश की धातु नहीं है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा इलैक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसे उद्योगों में इस्तेमाल होता है। इस कारण औद्योगिक मांग का असर चांदी पर बहुत जल्दी पड़ता है। इसके अलावा, जब भी बाजार में कोई अनिश्चितता या घबराहट आती है, तो निवेशक सोने के मुकाबले चांदी से अपना पैसा ज्यादा तेजी से बाहर निकालते हैं, जिससे इसकी कीमतों में ज्यादा तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति भी है कारण इस पूरी गिरावट के तार अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े हैं। फेडरल रिजर्व ने भले ही अपनी ब्याज दरों को 3.75 फीसदी से 4.00 फीसदी के बीच बिना किसी बदलाव के स्थिर रखा हो, लेकिन अधिकारियों के रुख से यह संकेत मिले हैं कि आने वाले समय में ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं।


