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AI Chatbot की सलाह बनी जानलेवा? मिर्गी की दवा बंद करने के बाद 31 साल की इंजीनियर की मौत

 डेस्क: आज के समय में लोग छोटी-बड़ी हर परेशानी का जवाब पाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेने लगे हैं। पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम और सेहत से जुड़ी जानकारी तक, लोग चैटबॉट से सवाल पूछते हैं। लेकिन क्या किसी AI चैटबॉट की सलाह पर डॉक्टर की बताई दवा बंद करना सही है? अमेरिका से सामने आए एक मामले ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है। अमेजॉन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाली 31 वर्षीय बोवेन वान की मौत के बाद उनके परिवार ने OpenAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। परिवार का आरोप है कि बोवेन ने ChatGPT की सलाह पर मिर्गी की दवा लेना बंद कर दिया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई। मामले में सामने आए कथित चैट रिकॉर्ड्स ने AI की मेडिकल सलाह और उसकी जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दवा के साइड इफेक्ट्स से परेशान थीं बोवेन
रिपोर्ट के मुताबिक, बोवेन वान मिर्गी की बीमारी से पीड़ित थीं और इसके इलाज के लिए लैमोट्रिजिन (Lamotrigine) नाम की दवा ले रही थीं। बताया गया है कि वह करीब 400 मिलीग्राम की खुराक ले रही थीं। हालांकि, दवा के कारण उन्हें सोचने-समझने और अंग्रेजी बोलने में परेशानी महसूस हो रही थी। इन दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए वह दवा की खुराक कम करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय ChatGPT से बातचीत शुरू कर दी। परिवार की ओर से दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि चैटबॉट ने उन्हें दवा की खुराक धीरे-धीरे कम करने का प्लान दिया। यह खुराक आखिरकार शून्य तक पहुंच गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि चैटबॉट ने उन्हें अपनी दवा कम करने की बात डॉक्टर से छिपाने की सलाह भी दी।
डॉक्टर ने दवा कम करने से किया था मना
मामले में सामने आए चैट रिकॉर्ड्स के अनुसार, जब बोवेन के डॉक्टर ने मिर्गी की दवा कम करने से मना किया, तो उन्होंने इस बारे में भी ChatGPT से बात की। आरोप है कि चैटबॉट ने डॉक्टर की सलाह के बावजूद दवा की खुराक कम करने के तरीके सुझाए। बताया गया है कि चैटबॉट ने उन्हें 5 मिलीग्राम की गोलियां लेने और उन्हें पिल-कटर की मदद से छोटे हिस्सों में बांटकर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था। परिवार का आरोप है कि चैटबॉट ने इस दौरान बोवेन को यह भरोसा दिलाया कि दवा की खुराक कम करना उनके लिए संभव और सही है। जबकि मिर्गी की दवा अचानक बंद करना या बिना डॉक्टर की निगरानी के उसकी खुराक बदलना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
158 बार जताया डर, फिर भी मिलता रहा दिलासा
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू बोवेन और ChatGPT के बीच हुई बातचीत बताई जा रही है। मुकदमे में दावा किया गया है कि बोवेन ने कम से कम 158 बार चैटबॉट के सामने अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने दवा कम करने के बाद दौरे पड़ने, चक्कर आने और दिमाग में दबाव महसूस होने जैसी परेशानियों का जिक्र किया। लेकिन आरोप है कि चैटबॉट ने उन्हें बार-बार दिलासा दिया और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेने के बजाय सामान्य प्रक्रिया बताता रहा। जब बोवेन को बोलने में भी परेशानी होने लगी, तब भी चैटबॉट ने कथित तौर पर उन्हें भरोसा दिलाया कि उनका दिमाग खुद को दोबारा सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश कर रहा है। परिवार का यह भी आरोप है कि आपातकालीन मदद लेने की जरूरत महसूस होने पर भी चैटबॉट ने स्थिति की गंभीरता को सही तरीके से नहीं पहचाना।

11 फरवरी को भेजा आखिरी मैसेज, तीन दिन बाद मिला शव
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 फरवरी 2026 की रात बोवेन ने ChatGPT को अपना आखिरी मैसेज भेजा था। इसके बाद सिएटल स्थित उनके अपार्टमेंट में उनकी मौत हो गई। बताया गया है कि तीन दिन बाद उनका शव बरामद हुआ।उनकी मौत के बाद परिवार को ChatGPT के साथ हुई बातचीत के रिकॉर्ड मिले। इन्हीं चैट लॉग्स के आधार पर परिवार ने आरोप लगाया कि चैटबॉट ने बिना चिकित्सकीय योग्यता के डॉक्टर की तरह सलाह दी और बोवेन को दवा बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी आधार पर उनके माता-पिता ने OpenAI के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और मौत के कारणों पर अंतिम फैसला अदालत की जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही होगा।
OpenAI ने क्या कहा
इस मामले पर OpenAI के प्रवक्ता डु पुसाटेरी ने बोवेन की मौत को बेहद दुखद बताया। कंपनी के अनुसार, बोवेन ChatGPT के GPT-4o मॉडल का इस्तेमाल कर रही थीं। कंपनी ने कहा कि इस मॉडल को 13 फरवरी 2026 को ऐप से हटा दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मॉडल को लेकर पहले भी जरूरत से ज्यादा सहमति जताने और संवेदनशील परिस्थितियों में गलत दिशा में जवाब देने जैसी चिंताएं सामने आई थीं। OpenAI का कहना है कि नए AI मॉडल को आपातकालीन स्थितियों की पहचान करने और ऐसे मामलों में बेहतर प्रतिक्रिया देने के लिए विकसित किया गया है।
मातृभाषा में बातचीत को लेकर भी उठे सवाल
इस मामले में एक और पहलू पर सवाल उठाए गए हैं। मुकदमे में दावा किया गया है कि बोवेन जब चीनी भाषा में चैटबॉट से बात करती थीं, तो AI उनकी बातों से सहमति जताने और उनकी सलाह को सही ठहराने की प्रवृत्ति दिखाता था।हालांकि, यह भी जांच का विषय है कि बातचीत की भाषा और चैटबॉट के जवाबों का इस पूरे मामले पर कितना असर पड़ा।
AI डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह के लिए AI पर कितना भरोसा करना चाहिए। चैटबॉट बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी और भाषा के पैटर्न के आधार पर जवाब तैयार करते हैं। लेकिन वे डॉक्टर की तरह मरीज की शारीरिक जांच, मेडिकल हिस्ट्री और पूरी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन नहीं कर सकते। खासकर मिर्गी, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों जैसी स्थितियों में दवा की खुराक अपने मन से कम करना या अचानक बंद करना खतरनाक हो सकता है।
ध्यान रखें: AI से बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी जरूर ली जा सकती है, लेकिन उसकी सलाह पर डॉक्टर की दवा बंद करना या उसकी खुराक बदलना सही नहीं है। अगर किसी दवा के साइड इफेक्ट्स महसूस हो रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें। दवा में बदलाव हमेशा विशेषज्ञ की निगरानी में ही होना चाहिए।

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