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लहजा ही उनकी पहचान बना… Esha Deol ने किया साउथ इंडियन एक्सेंट का समर्थन, Sridevi-Hema Malini का किया जिक्र

डेस्क: अभिनेताओं के हिंदी बोलने के तरीके को लेकर हो रही ट्रोलिंग के बीच, अभिनेत्री ईशा देओल साउथ इंडियन लहजे के समर्थन में सामने आई हैं। ‘धूम गर्ल’ ने कहा कि बोलने के ऐसे अलग अंदाज किसी कलाकार के अभिनय को कम नहीं करते, बल्कि उनकी शख्सियत को और निखारते हैं।

दिग्गज कलाकार हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की बेटी ईशा ने बताया कि जब वह डायलॉग बोलती हैं – खासकर हिंदी में तो उनकी आवाज काफी हद तक अपनी मां जैसी लगती है। उनका मानना है कि किसी अभिनेता के बोलने का खास अंदाज उनकी पहचान का ही एक हिस्सा होता है। ईशा ने कहा, “जब मैं डायलॉग बोलती हूं, खासकर हिंदी में, तो मेरी आवाज काफी हद तक मेरी मां जैसी लगती है। लेकिन यही तो मैं हूं और जो निर्देशक मुझे किसी किरदार के लिए चुनते हैं, वे यह बात जानते हैं। मुझे तो यह बहुत प्यारा और अच्छा लगता है। मुझे उन लोगों को सुनना अच्छा लगता है जिनकी बोली में थोड़ा अलग लहजा होता है।
उन्होंने दिवंगत दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी, अपनी मां हेमा मालिनी और अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि इन कलाकारों का लहजा ही उनकी एक अलग स्क्रीन पहचान बन गया था।
श्रीदेवी जिन्हें वह प्यार से ‘श्री आंटी’ कहती थीं – के बारे में बात करते हुए ईशा ने कहा कि उन्हें उनके बोलने का अंदाज बहुत पसंद था। साथ ही, उन्होंने बताया कि वह उर्मिला मातोंडकर की भी बहुत बड़ी फैन हैं और उन्हें उर्मिला का लहजा भी काफी आकर्षक लगता था।
उन्होंने कहा, “जैसे श्री आंटी’ की बोली में एक खास लहजा था, वैसा ही मेरी मां और उर्मिला की बोली में भी था। मैं उर्मिला की बहुत बड़ी फैन हूं और मुझे उनका वह खास लहजा बहुत पसंद था। यही तो उन्हें सबसे अलग बनाता है। मुझे लगता है कि हर अभिनेता की अपनी एक ऐसी ही खासियत होती है।”
ईशा की इन बातों से हेमा मालिनी के हिंदी डायलॉग बोलने के खास अंदाज की भी याद आती है; खासकर उनके ‘नहीं’ कहने का तरीका, जो उनकी स्क्रीन पहचान का एक जाना-पहचाना हिस्सा बन गया था। श्रीदेवी भी अपनी खास हिंदी उच्चारण शैली के लिए जानी जाती थीं, जिस पर उनके दक्षिण भारतीय भाषाई बैकग्राउंड का प्रभाव था। अपने हिंदी फिल्मी करियर की शुरुआत में भाषा को लेकर चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, वह भारतीय सिनेमा की सबसे मशहूर स्टार्स में से एक बन गईं।
ईशा की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब दक्षिण भारतीय कलाकारों को उनके लहजे के लिए ट्रोल किए जाने को लेकर फिर से चर्चा हो रही है। अभिनेत्री की ये बातें इस बात पर जोर देती हैं कि भारत की सांस्कृतिक विविधता में भाषाई विभिन्नता एक स्वाभाविक हिस्सा है। इसलिए, यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि हर कलाकार एक जैसा ही बोलेगा। ईशा देओल की बात करें तो, वह एक्शन-क्राइम ड्रामा ‘प्रताप’ के जरिए पर्दे पर वापसी कर रही हैं। एक लंबे अंतराल के बाद हिंदी फिल्मों में उनकी यह वापसी है।
हाल ही में हिंदी सिनेमा में दक्षिण भारतीय लहजे को लेकर बहस फिर से छिड़ गई है। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने बताया है कि उन्हें अपनी हिंदी बोलने के तरीके और लहजे को लेकर ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा है।
बॉलीवुड में लोकप्रिय होने से पहले कन्नड़ और तेलुगु सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाली इस अभिनेत्री ने कहा है कि वह अपनी दक्षिण भारतीय पहचान को अपनाती हैं और उन्हें अपने बोलने के तरीके के लिए शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं लगती। गीतकार और लेखक जावेद अख्तर तथा अभिनेत्री मधु ने इस अभिनेत्री के समर्थन में अपनी बात रखी है।

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