डेस्क: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं निर्वाचन आयोग पर मतदाता सूची में कथित हेरफेर के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि दोनों मिलकर ”भारत के लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों को धोखा दे रहे हैं।” यहां सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यादव ने आरोप लगाया कि जब भाजपा का जनसमर्थन घटता है और उसकी हार की आशंका बढ़ती है, तो वह निर्वाचन आयोग की आड़ लेती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रशासन के सहयोग से चुनावों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की तैयारी कर रही है और सपा वर्ष 2022 से इस मुद्दे को उठाती रही है।
यादव ने भाजपा की कथित ’10 चुनावी चालों’ का जिक्र करते हुए फर्जी मतदाता जोड़ने, विरोधियों के वास्तविक वोट कटवाने, मतदान से पहले पैसे और भोजन बांटने, मतदाताओं को डराने, ईवीएम में हेरफेर और मतगणना में धांधली के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हारने वाले उम्मीदवारों को विजेता घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जाते हैं तथा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में फूट डालकर उनके विधायकों को तोड़ा जाता है। सपा प्रमुख ने बताया कि पार्टी के ‘पीडीए प्रहरी’ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की जांच कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, इस दौरान 19.2 लाख संदिग्ध फर्जी मतदाता प्रविष्टियों की पहचान की गई है। यादव ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए कुल 87.66 लाख फॉर्म-6 आवेदन मिले थे, जिनमें से 84.30 लाख नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए गए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने केवल 71.38 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया और 16.18 लाख आवेदनों की जानकारी सामने नहीं रखी। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों के अतिरिक्त पार्टी कार्यकर्ताओं ने तीन लाख और संदिग्ध प्रविष्टियां चिह्नित की हैं। यादव ने कहा कि कुछ रिकॉर्ड में मतदाताओं और उनके माता-पिता के नाम समान हैं।
उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में 10,000 से 15,000 तक संदिग्ध प्रविष्टियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जिन सीटों पर हार का डर था, वहां ऐसी गड़बड़ियां अधिक थीं। मुरादाबाद नगर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा 782 वोटों से हारी थी। उनके दावे के मुताबिक, इसके बाद वहां करीब 8,000 से 10,000 संदिग्ध फर्जी प्रविष्टियां जोड़ी गईं। उन्होंने कुछ रिकॉर्ड दिखाते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति के नाम पर 10 और शंभू शंकर शर्मा के नाम पर चार प्रविष्टियां थीं।
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी प्रविष्टियों का इस्तेमाल चुनाव परिणाम प्रभावित करने के लिए हो सकता है। यादव ने बताया कि पार्टी ने फर्जी और दोहरी प्रविष्टियों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन्होंने मतदाताओं से अपने पहचान पत्र नंबर के जरिए रिकॉर्ड जांचने की अपील की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा स्तर पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पदों पर पीडीए समुदायों के किसी सदस्य को नियुक्त नहीं किया गया और निर्वाचन आयोग को इस दावे को गलत साबित करने की चुनौती दी।


