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जल्द पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएंगे मोदी, उप-राष्ट्रपति इस्तीफा दे सकते हैं तो CEC क्यों नहीं : पायलट

डेस्क: कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बुधवार को कहा कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और इसका विरोध करने वालों की आवाज को पुलिसिया कार्रवाई तथा लाठी के दम पर नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने यह दावा भी किया कि नरेन्द्र मोदी जल्द ही ‘पूर्व प्रधानमंत्री’ हो जाएंगे। पायलट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी दलों की मांग का उल्लेख किया और कहा कि यदि उप राष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ का इस्तीफा हो सकता है तो फिर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का त्यागपत्र क्यों नहीं हो सकता। उनका कहना था कि कांग्रेस को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है तथा लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना और अदालत का दरवाजा खटखटाना मौलिक अधिकार है।

उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के बारे में पूछे जाने पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘वह जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएंगे।’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर उन्होंने कहा कि वह ‘बहुत जल्द विश्वसनीयता खो देंगे।’ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा समय सिर्फ विपक्ष के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि संस्थाओं पर लगातार ‘कब्जा’ किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘चुनाव नतीजे बताते हैं कि कौन जीतता है और कौन हारता है, लेकिन हमारे लोकतंत्र की रक्षा का जिम्मा संभालने वाला निर्वाचन आयोग आज गंभीर सवालों के घेरे में है।’
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग से सवाल किए जाने पर जवाब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता देते हैं और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कांग्रेस महासचिव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के प्रधान न्यायाधीश होते थे, लेकिन कानून में बदलाव के बाद प्रधान न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया गया। इससे, सरकार को चयन प्रक्रिया में ”स्वाभाविक रूप से 2-1 का बहुमत” मिल गया।
पायलट ने मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि स्थापित व्यवस्था के तहत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को यह काम करना होता है, लेकिन उनकी शक्तियां कम कर दी गईं और निर्णय केंद्रीय स्तर पर लिए जाने लगे। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से 13.3 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम ‘जानबूझकर अस्थायी रूप से बाहर’ किए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब करीब 300 निर्वाचित सांसद निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी बात रखने गए तो उनसे मुलाकात नहीं की गई।
पायलट ने कहा कि इन मुद्दों पर कांग्रेस का संघर्ष सिर्फ किसी चुनाव में हार-जीत को लेकर नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने के लिए है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग निर्वाचन आयोग के नेतृत्व में जवाबदेही तय करने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था एक ‘विशिष्ट राजनीतिक एजेंडे’ के अनुरूप काम कर रही है। विपक्षी नेताओं की ओर से उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ‘हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उच्चतम न्यायालय अंतिम प्राधिकार है।’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘लोकतंत्र में विरोध करना और अदालत में याचिका दायर करना मौलिक अधिकार है। नागरिकों व अपनी बात कह रहे युवाओं की आवाज को कोई पुलिस बल या लाठीचार्ज नहीं दबा सकता।’ कांग्रेस नेता ने नीट परीक्षा और प्रश्नपत्र लीक के मामलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि जनता के दबाव के कारण सरकार और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इन मुद्दों पर ध्यान देना पड़ा। पायलट ने पॉडकास्ट में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी करने के लिए कहे जाने पर पार्टी की संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी को ‘कड़ी मेहनत से सम्मान अर्जित करने वाली शख्सियत’ बताया।
वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बारे में उन्होंने कहा, ‘एक ऐसे नेता, जिन पर उत्सकुता के साथ नजर बनाए रखनी चाहिए।’ कांग्रेस महासचिव ने प्रियंका गांधी वाद्रा को ‘बेहद प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व’ करार दिया। ‘जेन-जी’ के बारे में पूछे जाने पर पायलट ने कहा कि उन्हें इस पीढ़ी पर ‘100 प्रतिशत भरोसा’ है।

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