डेस्क: महिलाओं की जिंदगी में मेनोपॉज यानी पीरियड्स का हमेशा के लिए बंद होना एक नेचुरल प्रक्रिया है। आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच ऐसा होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। कभी नींद ठीक से नहीं आती, कभी मूड बदलता रहता है, तो कभी वजन बढ़ने लगता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि मेनोपॉज का असर दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है? दरअसल, मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। यह हार्मोन महिलाओं के शरीर में कई जरूरी काम करता है और दिल की सेहत से भी इसका संबंध है। एस्ट्रोजन में कमी के साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी में बदलाव आ सकते हैं। इन कारणों से कुछ महिलाओं में हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ सकता है।
अमेरिका के बोर्ड-सर्टिफाइड कार्डियोवस्कुलर सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने 5 अक्टूबर को शेयर किए गए एक वीडियो में मेनोपॉज और दिल की सेहत के बीच संबंध को समझाया। 25 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डॉ. लंदन के मुताबिक, इस दौरान महिलाओं को दिल से जुड़े जोखिमों पर खास ध्यान देना चाहिए। आइए जानते हैं मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले तीन बड़े बदलावों के बारे में।
बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर
मेनोपॉज के बाद कुछ महिलाओं का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें एस्ट्रोजन के स्तर में कमी भी शामिल है।
एस्ट्रोजन रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। इसकी कमी के साथ रक्त वाहिकाओं की लचक और उन्हें रिलैक्स रखने वाली प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। नाइट्रिक ऑक्साइड एक ऐसा पदार्थ है, जो रक्त वाहिकाओं को फैलने और सामान्य तरीके से काम करने में मदद करता है। इन प्रक्रियाओं में बदलाव आने पर ब्लड प्रेशर बढ़ने की आशंका हो सकती है। अगर लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहे, तो दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरी कार्डियोवस्कुलर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक करें। खाने में नमक की मात्रा सीमित रखें, नियमित रूप से चलें या एक्सरसाइज करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाएं लें।
कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ सकता है
मेनोपॉज के दौरान कोलेस्ट्रॉल में बदलाव भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकता है। एस्ट्रोजन कम होने के साथ शरीर में फैट के इस्तेमाल और उसे नियंत्रित करने की प्रक्रिया में बदलाव आ सकते हैं। कुछ महिलाओं में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल और अन्य हानिकारक लिपोप्रोटीन का स्तर बढ़ सकता है। डॉ. जेरेमी लंदन ने अपने वीडियो में ApoB वाले एथेरोजेनिक लिपोप्रोटीन का भी जिक्र किया। ये ऐसे कण होते हैं, जो धमनियों में फैट जमा होने की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं। समय के साथ धमनियों में प्लाक जमा होने से वे संकरी हो सकती हैं और दिल तक खून पहुंचने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि मेनोपॉज के आसपास महिलाओं को केवल वजन पर ही नहीं, बल्कि कोलेस्ट्रॉल और दूसरे जोखिम वाले कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं। अपनी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें। तली-भुनी चीजों और अधिक सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
पेट के आसपास बढ़ सकती है अंदरूनी चर्बी
क्या मेनोपॉज के बाद आपको भी लगता है कि वजन खासकर पेट के आसपास बढ़ रहा है? ऐसा कई महिलाओं के साथ हो सकता है। इस उम्र में हार्मोनल बदलाव और उम्र बढ़ने के कारण शरीर में फैट जमा होने का तरीका बदल सकता है। पेट के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होने वाली चर्बी को विसरल फैट कहा जाता है। इस तरह की चर्बी ज्यादा होने पर शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में परेशानी होने की आशंका रहती है। इसके साथ हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी जुड़ सकती है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मेनोपॉज के बाद कमर के आसपास बढ़ती चर्बी को केवल दिखावट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह आपकी सेहत पर ध्यान देने का संकेत भी हो सकती है। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलें या दूसरी शारीरिक गतिविधियां करें। संतुलित डाइट लें, पर्याप्त नींद लें और लंबे समय तक बैठे रहने से बचें। वजन या कमर तेजी से बढ़ रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
मेनोपॉज के बाद दिल को स्वस्थ कैसे रखें
मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि महिलाओं के जीवन का एक सामान्य चरण है। हालांकि, इस दौरान दिल की सेहत से जुड़े कुछ जोखिम बढ़ सकते हैं। अच्छी बात यह है कि रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करके इन जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
नियमित एक्सरसाइज करें: पैदल चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी गतिविधियां अपनाएं।
खानपान पर ध्यान दें: फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन के अच्छे स्रोत डाइट में शामिल करें।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं: डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करवाते रहें।
ब्लड शुगर पर नजर रखें: खासकर अगर परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री है या दूसरे जोखिम मौजूद हैं।
नींद पूरी करें: पर्याप्त और नियमित नींद शरीर के सामान्य कामकाज और दिल की सेहत के लिए जरूरी है।
तनाव को मैनेज करें: योग, ध्यान और अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालें।
धूम्रपान से दूर रहें: धूम्रपान दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
अगर सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर या दर्द का बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण कभी-कभी अलग तरह से भी सामने आ सकते हैं। ऐसे लक्षण अचानक आएं या गंभीर हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
ध्यान देने वाली बात: मेनोपॉज का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को हार्ट अटैक या दिल की बीमारी होगी। लेकिन इस दौरान हार्ट डिजीज के कुछ जोखिम वाले कारक बढ़ सकते हैं। इसलिए समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह से दिल की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है।


