डेस्क: स्टिंग वीडियो (Sting video) को लेकर चल रहे विवाद में कर्नाटक (Karnataka) के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को अदालत से अंतरिम राहत मिली है। बेंगलुरु की अदालत (Court) में न्यायाधीश बी. पुष्पांजलि ने विवादित वीडियो के प्रसारण, अपलोडिंग और शेयरिंग पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह अंतरिम रोक सोशल मीडिया सहित सभी प्लेटफॉर्म पर लागू होगी।
सिद्धारमैया ने अदालत में याचिका दायर कर वीडियो को दिखाने और साझा करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उनका आरोप है कि वीडियो के जरिए उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित अभियान बताते हुए वीडियो से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।
सिद्धारमैया बोले- गलत जानकारी फैलाने की कोशिश
पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह वीडियो साझा किया जा रहा है। इसके साथ ही उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाने का अभियान चलाया जा रहा है। सिद्धारमैया ने इसे उनकी छवि खराब करने की कोशिश करार दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में झूठ को सच के रूप में पेश करना आसान हो गया है। उन्होंने मीडिया संस्थानों और आम लोगों से अपील की कि वे ऐसी सामग्री को आगे साझा न करें, जिसे वह भ्रामक बता रहे हैं।
इस मामले में सिद्धारमैया ने शहर के पुलिस आयुक्त के पास भी शिकायत दर्ज कराई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं और उन्होंने कभी मीडिया को अपना काम करने से नहीं रोका। हालांकि, उनके अनुसार कुछ मीडिया संस्थानों की ओर से इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग किए जाने के कारण उन्हें न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
पांच दशक के राजनीतिक सफर का दिया हवाला
सिद्धारमैया ने अपनी करीब पांच दशक लंबी राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्नाटक की जनता उनके सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक सफर से परिचित है। उन्होंने भरोसा जताया कि अंततः सच्चाई सामने आएगी।
बेटे यतींद्र ने भी वीडियो को बताया फर्जी
कर्नाटक सरकार में मंत्री और सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने भी विवादित वीडियो को फर्जी बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे उनके पिता की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा है। यतींद्र के अनुसार, इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दी गई है।
यतींद्र ने इस वीडियो को स्टिंग ऑपरेशन मानने से भी इनकार किया। उनका कहना है कि यह किसी व्यक्ति की छवि खराब करने और उसके खिलाफ गलत प्रचार फैलाने की साजिश है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि लोगों के सामने वास्तविक तथ्य नहीं होंगे, तो वे वीडियो को असली मान सकते हैं।
यतींद्र ने कहा कि राजनीति का स्तर इस हद तक गिर गया है कि सिद्धारमैया जैसे वरिष्ठ नेता को भी इस तरह के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने कुछ गलत नहीं किया है, तो उसे ऐसी घटनाओं से निराश होने की जरूरत नहीं है।


