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बच्चों के फेफड़ों को गंभीर बीमारी दे रहे कबूतर , Parents के लिए अलर्ट

डेस्क : क्या आपके घर की बालकनी में भी कबूतर बार-बार आते हैं? अगर हां, तो उनकी बीट और पंखों से होने वाली गंदगी को केवल साफ-सफाई की समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। पक्षियों की बीट, पंखों से निकलने वाले कण, फफूंदी और गंदे एयर कूलर या वेंटिलेशन सिस्टम में मौजूद कुछ सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। खास परिस्थितियों में इनके संपर्क से हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस (Hypersensitivity Pneumonitis) नाम की बीमारी हो सकती है।

क्या है हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस (Hypersensitivity Pneumonitis)?
हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस फेफड़ों में होने वाली सूजन से जुड़ी एक स्थिति है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वातावरण में मौजूद कुछ पदार्थों के प्रति जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया कर सकती है। पक्षियों की बीट या पंखों से जुड़े प्रोटीन, फफूंदी और कुछ अन्य जैविक कण इसके संभावित कारण हो सकते हैं। जब कोई संवेदनशील व्यक्ति बार-बार ऐसे कणों को सांस के जरिए अंदर लेता है, तो फेफड़ों में सूजन हो सकती है। कुछ लोगों में इसके लक्षण कम समय में दिखाई देते हैं, जबकि अन्य में परेशानी धीरे-धीरे बढ़ सकती है। लंबे समय तक संपर्क बने रहने और बीमारी का इलाज न होने पर फेफड़ों को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस सामान्य संक्रामक बीमारी नहीं है और यह एक बच्चे से दूसरे बच्चे में नहीं फैलती। हालांकि, पक्षियों की बीट में मौजूद कुछ अन्य सूक्ष्मजीव अलग-अलग संक्रमण पैदा कर सकते हैं, इसलिए सफाई और स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।
बच्चों में हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस के लक्षण
अगर बच्चा लंबे समय से पक्षियों की बीट, फफूंदी या किसी अन्य संभावित कारण के संपर्क में है, तो इन लक्षणों पर ध्यान दें
बार-बार खांसी आना: बच्चे को लगातार या बार-बार सूखी खांसी हो सकती है।
सांस लेने में परेशानी: खेलने, दौड़ने या सामान्य गतिविधियों के दौरान सांस फूल सकती है।
बुखार या ठंड लगना: कुछ मामलों में संपर्क के बाद फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
असामान्य थकान: बच्चा जल्दी थक सकता है या सामान्य गतिविधियों में कम रुचि दिखा सकता है।
सीने में जकड़न या परेशानी: कुछ बच्चों को सांस लेते समय असहजता महसूस हो सकती है।
ये लक्षण केवल हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनिटिस के नहीं हैं। अस्थमा, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।

कबूतरों की बीट फेफड़ों को कैसे प्रभावित कर सकती है?
कबूतरों की बीट और पंखों से जुड़े कुछ प्रोटीन संवेदनशील व्यक्तियों में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, जमा हुई बीट में फफूंदी या अन्य सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं। जब सूखी गंदगी को झाड़ू से हटाया जाता है या वह हवा में उड़ती है, तो उसके छोटे कण सांस के जरिए अंदर जा सकते हैं। इसी तरह, नमी वाली जगहों, गंदे एयर कूलर और खराब तरीके से साफ किए गए वेंटिलेशन सिस्टम में फफूंदी या अन्य सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं, जो कुछ लोगों में सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।  इसलिए बालकनी में कबूतरों की बीट जमा न होने दें और सफाई करते समय सूखी गंदगी को हवा में उड़ाने से बचें।
बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
बालकनी को नियमित रूप से साफ रखें: कबूतरों की बीट और पंखों को लंबे समय तक जमा न होने दें। सफाई के दौरान बच्चों को उस जगह से दूर रखें।
सूखी बीट को झाड़ू से उड़ाने से बचें: सूखी गंदगी को जोर से झाड़ने या वैक्यूम करने से कण हवा में फैल सकते हैं। सफाई करते समय धूल उड़ने से बचाने वाली सुरक्षित विधि अपनाएं। अगर बीट अधिक मात्रा में जमा है, तो प्रशिक्षित सफाईकर्मी की मदद लें।
कबूतरों का बालकनी में जमाव रोकें: बालकनी को साफ रखें और जहां संभव हो, सुरक्षित बर्ड-नेट या अन्य उपयुक्त अवरोध लगवाएं। ध्यान रखें कि किसी पक्षी को नुकसान न पहुंचे।
एयर कूलर और वेंटिलेशन की सफाई करें: कूलर की पानी की टंकी, फिल्टर और अन्य हिस्सों को निर्माता के निर्देशों के अनुसार साफ करें। घर में सीलन या फफूंदी दिखाई दे, तो उसके स्रोत को ठीक करवाएं।
बच्चों की सेहत पर नजर रखें: अगर बच्चे को लगातार खांसी, सांस फूलने, बुखार या असामान्य थकान की परेशानी हो रही है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। डॉक्टर को घर में कबूतरों की मौजूदगी, बीट या फफूंदी के संभावित संपर्क के बारे में भी बताएं।

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
अगर बच्चे को बार-बार खांसी हो रही है या सांस लेने में परेशानी बनी हुई है, तो जांच में देरी न करें। डॉक्टर लक्षणों और संभावित संपर्क की जानकारी लेने के बाद जरूरत के अनुसार फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच, रक्त जांच या इमेजिंग जैसे परीक्षण सुझा सकते हैं। अगर बच्चे को बहुत ज्यादा सांस फूल रही हो, होंठ नीले पड़ रहे हों या सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।

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