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CJP Protest: अभिजीत दिपके, सौरव दास और रांका को इस शर्त पर मिली रिहाई, पार्टी बोली-कॉकरोच कभी नहीं मरते

डेस्क: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके (Abhijit Dipke) और उनके दो साथियों को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) अदालत में पेश किया गया। अदालत ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ शर्तों के साथ 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। इन नेताओं को अगले एक साल की अवधि तक शांति व्यवस्था बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है। तीनों सदस्य इस निर्धारित अवधि में किसी भी प्रकार की शांति भंग करने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। उन्हें किसी भी तरह के उपद्रव या अशांति फैलाने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। यह शर्त उनकी तत्काल रिहाई के लिए अनिवार्य रूप से रखी गई है। वकील रत्ना सिंह ने सामाजिक माध्यम के जरिये CJP के इन नेताओं की रिहाई से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

रिहाई की प्रमुख शर्तें
अदालत ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर मुक्त किया है। उन्हें इस अवधि के दौरान किसी भी सार्वजनिक अशांति में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश दिल्ली में कानून व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के प्राथमिक उद्देश्य से जारी किया गया है। अदालत का यह निर्णय सभी संबंधित पक्षों पर लागू होगा।
कॉकरोच जनता पार्टी की प्रतिक्रिया
तीनों नेताओं की रिहाई पर सीजेपी ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई है। ‘आखिरकार दिल्ली पुलिस को अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करना पड़ा है। कॉकरोच कभी मरते नहीं हैं।
इन शर्तों पर मिली रिहाई
दिल्ली पुलिस ने बताया कि अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को BNSS की धारा 126/170 के तहत एहतियातन गिरफ़्तार किया गया था। सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और आज उन्हें एसईएम कोर्ट, दिल्ली कैंट के सामने पेश किया गया। एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए 50,000 रुपये का जमानत बॉन्ड भरा गया और कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।
उधर, कनाट प्लेस की तरफ आउटर सर्किल में कुछ प्रदर्शनकारी मौजूद हैं। चार प्रदर्शनकारियों को डीडीयू मार्ग से और दो-तीन को अशोक रोड से डिटेन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आसपास भी भीड़ जुटने की इजाजत नहीं है, भगवान दास रोड पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात है।
नौकरी से इस्तीफे की फर्जी वीडियो वायरल
वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो फिर से शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक व्यक्ति गलत दावा कर रहा है कि वह दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर है और उसने हाल ही में चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।
दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड की जांच करने पर ऐसा कोई सब-इंस्पेक्टर नहीं मिला जिसकी जानकारी वीडियो में बताए गए विवरण से मेल खाती हो। इसलिए, यह दावा असत्यापित और गुमराह करने वाला है।
पुलिस ने दावे को बताया गलत
गुमराह करने वाली सामग्री बनाने या उसे फैलाने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर पहले ही 24 जुलाई 2026 को स्पष्टीकरण जारी किया था, और इस बार उसी वीडियो को फिर से गलत इरादे से फैलाया जा रहा है। जनता को सलाह दी जाती है कि वे केवल सत्यापित आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और असत्यापित दावों को शेयर करने से बचें।

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