डेस्क: हिंदी सिनेमा में प्रेम कहानियों का एक लंबा और सफल इतिहास रहा है। कॉलेज लाइफ, दोस्ती, प्यार, करियर और दिल की उलझनों पर बनी फिल्मों ने लंबे समय तक युवा दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा है। लेकिन 2 अक्टूबर को रिलीज हुई ‘Prem Keetanu’ के साथ ऐसा देखने को नहीं मिला। रिलेटेबल कहानी, नॉस्टैल्जिक फील और म्यूजिक के बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर ठंडी प्रतिक्रिया मिली।
प्यार, दोस्ती और कॉलेज लाइफ की कहानी
‘Prem Keetanu’ एक ऐसे युवा की कहानी है, जो नौकरी की तलाश के साथ प्यार में पड़ता है और अपने करियर व रिश्ते के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। फिल्म मिडिल क्लास परिवार में बड़े होने की असुरक्षा, करियर को लेकर संघर्ष और अपनी जिंदगी की दिशा तलाशने जैसी भावनाओं को दिखाती है। फिल्म में प्यार, दिल टूटने, जुदाई, जवानी और जश्न से जुड़े गाने भी हैं। इसके म्यूजिक को भी दर्शकों और रिव्यूज में सराहना मिली। फिल्म को एंटरटेनिंग, रिलेटेबल और नॉस्टैल्जिक बताया गया, लेकिन ये खूबियां इसे थिएटर में पर्याप्त दर्शक दिलाने में कामयाब नहीं रहीं।
क्या नई प्रेम कहानियों के लिए मुश्किल हुआ थिएटर?
एक दौर में ‘Pyaar Ka Punchnama’, ‘F.A.L.T.U.’ और ‘Ishaqzaade’ जैसी फिल्मों ने युवा दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बनाई थी। इन फिल्मों की कहानियां अपेक्षाकृत आम जिंदगी और युवाओं की भावनाओं से जुड़ी थीं। अब ऐसी नई कहानियों के लिए सिनेमाघरों में दर्शक जुटाना पहले से ज्यादा मुश्किल दिखाई दे रहा है। ‘Prem Keetanu’ की कमाई पर इसकी स्टारकास्ट का बड़ा नाम न होना भी असर डाल सकता है। इसके अलावा अजय देवगन की ‘Drishyam 3’ के साथ रिलीज क्लैश को भी फिल्म के लिए चुनौती माना जा सकता है। बड़ी फ्रेंचाइजी और बड़े सितारों वाली फिल्मों के बीच नई स्टारकास्ट वाली फिल्म को दर्शकों का ध्यान खींचने में काफी मेहनत करनी पड़ती है।
ओटीटी भी बन गया बड़ा मुकाबला
आज दर्शकों के पास घर बैठे अलग-अलग तरह का कंटेंट देखने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में थिएटर जाने के लिए फिल्म में कुछ ऐसा होना जरूरी हो गया है, जो दर्शक को बड़े पर्दे पर देखने के लिए प्रेरित करे। बढ़ती टिकट कीमतें भी इस बदलाव की एक वजह हो सकती हैं। दर्शक अब थिएटर जाने से पहले ज्यादा सोच-विचार कर रहे हैं और अक्सर बड़ी स्टारकास्ट, फ्रेंचाइजी या बड़े स्पेक्टेकल वाली फिल्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सबसे जरूरी हैं युवा दर्शक
Ormax के मुताबिक, अर्बन इंडिया में करीब 2.85 करोड़ रेगुलर हिंदी सिनेमा दर्शक हैं। 30 साल से कम उम्र के दर्शक हिंदी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस रेवेन्यू में 57 फीसदी और पहले दिन की कमाई में करीब 70 फीसदी योगदान देते हैं। यानी ‘Prem Keetanu’ जैसी फिल्मों के लिए युवा दर्शक सबसे अहम ऑडियंस हैं। लेकिन यही दर्शक अब थिएटर और ओटीटी के बीच अपनी पसंद को लेकर ज्यादा चुनिंदा हो गए हैं। फिल्म की कहानी उन युवाओं से आसानी से जुड़ सकती है, जो नौकरी, प्यार और परिवार की उम्मीदों के बीच अपना रास्ता तलाश रहे हैं। इसके बावजूद फिल्म को सिनेमाघरों में वह मौका नहीं मिल पाया, जिसकी उम्मीद थी।
‘Prem Keetanu’ की कहानी एक बड़े सवाल को सामने रखती है कि क्या आज के दौर में कॉलेज, दोस्ती और प्यार जैसी सरल और रिलेटेबल कहानियां दर्शकों को टिकट खरीदकर थिएटर तक लाने के लिए पर्याप्त हैं? या फिर हिंदी रोमांटिक फिल्मों को अब ओटीटी की सुविधा और बड़े बजट की फिल्मों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए कुछ नया तरीका तलाशना होगा?


