डेस्क: टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) टी. वी. नरेन्द्रन ने मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में घरेलू इस्पात मांग 8-10 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। उद्योग जगत के इस वरिष्ठ अधिकारी ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (आईएफक्यूएम) की संगोष्ठी 2026 से इतर यह बात कही।
भारतीय इस्पात उद्योग की संभावनाओं से जुड़े सवाल के जवाब में नरेन्द्रन ने कहा, ”मांग 8-10 प्रतिशत होनी चाहिए, क्योंकि इस्पात की खपत करने वाले सभी क्षेत्र काफी मजबूत हैं। इसलिए हम इस्पात उद्योग की संभावनाओं को लेकर काफी सकारात्मक हैं।” प्रस्तावित नीदरलैंड परियोजना के बारे में उन्होंने कहा कि कंपनी बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले मुद्दों को सुलझाने के लिए वहां की सरकार के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है।
नरेन्द्रन ने कहा, ”कोक ओवन को बंद करने से जुड़े मुद्दे हैं। इस्पात ‘स्लैग’ का वर्गीकरण और प्रबंधन कैसे किया जाए, इससे जुड़ा भी एक मुद्दा है। इसलिए बाध्यकारी समझौते पर पहुंचने से पहले इन सभी मुद्दों का समाधान करना होगा।” भारत की टाटा स्टील के पास नीदरलैंड के आईजेमुइडेन में एक इस्पात विनिर्माण संयंत्र है, जिसकी वार्षिक स्थापित क्षमता करीब 70 लाख टन है।
कंपनी ने इस संयंत्र में कम कार्बन उत्सर्जन वाली इस्पात उत्पादन प्रक्रियाएं स्थापित करके उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करने, स्थिर लागत कम करने तथा उत्पाद मिश्रण एवं ‘मार्जिन’ को बेहतर बनाने के लिए बदलाव कार्यक्रम अपनाया है।


