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2020 के दंगों और 2019 में जामिया में हिंसा का मामला : हाई कोर्ट ने SIT जांच की मांग वाली याचिकाएं पर सुनाया फैसला

डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें राष्ट्रीय राजधानी में 2020 के दंगों और CAA विरोधी प्रदर्शनों के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई 2019 की हिंसा की SIT जांच की मांग की गई थी। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा, ‘फैसले में बताई गई वजहों से सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।’ फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा, ‘इन याचिकाओं को दो हिस्सों में बांटा गया है, एक उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगे और दूसरा जामिया मिलिया के दंगे।’ विस्तृत फैसले का इंतजार है।

कोर्ट ने इन याचिकाओं पर अपना फैसला 24 जुलाई को सुरक्षित रख लिया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT), जांच आयोग या फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाने; मेडिकल इलाज; मुआवजा देने; और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। कुछ याचिकाओं में यह भी मांग की गई थी कि कथित नफरत भरे भाषणों के लिए राजनीतिक नेताओं पर केस दर्ज किया जाए और हिंसा व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR की जांच के लिए SIT बनाई जाए।
नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़प हुई थी जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 लोग घायल हुए थे। अन्य याचिकाएं दिसंबर 2019 में नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शनों के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा से संबंधित थीं। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि पुलिस बल द्वारा छात्रों पर की गई कथित ज्यादतियों की जांच के लिए एक ऐसी SIT की जरूरत थी जो पुलिस और केंद्र सरकार से स्वतंत्र हो।

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