दरभंगा : संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश व समाज के विकास में उनका दर्शन आज भी प्रासंगिक है। सत्य-अहिंसा व सदविचार के साथ साथ स्वच्छता हमारी संस्कृति रही है और गांधी जी इसके सबसे बड़े हिमायती थे। सर्वधर्म की समानता व स्वदेशी का उनका चिंतन आज भी जरूरी है। मौके पर बापू के सर्वाधिक दो प्रिय भजनों रघुपति राघव राजाराम…. एवं वैष्णव जन तो तेने कहिये…को भी सामूहिक रूप से गाया गया। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को भी उनकी जयंती पर याद करते हुए कुलपति ने उन्हें सादगी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी द्वारा दिया गया मूल मंत्र – जय जवान, जय किसान- आज भी देश की जरूरत है। उनके कृतत्व को सभी ने नमन किया। इसी तरह पूण्य तिथि पर महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कुलपति प्रो पांडेय ने उन्हें सबसे बड़ा समकालीन दधीचि बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा, संस्कृति व सनातन की रक्षा के लिए महाराजाधिराज द्वारा दिया गया दान बेमिसाल है। हमसभी आज उनके प्रति श्रद्धानवत हैं। उनके परिजन राजकुमार कपिलेश्वर सिंह व राजेश्वर सिंह भी अपनी वंश परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं, यह बहुत ही प्रशंसा की बात है। हमसभी कामना करते हैं कि राज परिवार सनातन की रक्षा करते रहें।
उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि इस अवसर पर मुख्यालय स्थित महाराजाधिराज डॉ सिंह की प्रतिमा एवं गांधी जी व शास्त्री जी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। साथ ही सभी महान विभूतियों को बार बार नमन करते हुए उनके विचारों व आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया।इसी क्रम में वित्त पदाधिकारी डॉ पवन कुमार झा, सहायक प्राध्यापक डॉ यदुवीर स्वरूप शास्त्री ने भी विस्तार से गांधी जी, शास्त्री जी व महाराजाधिराज के बारे में बताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान की प्रस्तुति पश्चात किया गया। मौके पर एनएसएस के पाधिकारी डॉ सुधीर कुमार व डॉ साधना शर्मा, ओएसडी डॉ रामसेवक झा, डॉ शंभुशरण तिवारी, डॉ अवधेश श्रोत्रिय, सुशील कुमार झा, अभिमन्यु कुमार, संजय कुमार समेत कई कर्मी व छात्र उपस्थित थे।


