डेस्क: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान करोड़ों पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने के आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग ने अपने राज्य निर्वाचन अधिकारियों को उन क्षेत्रों में ”छूटे हुए” और नए मतदाताओं को तुरंत शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम पूरा हो चुका है। इस अभियान का मकसद उन उन पात्र मतदाताओं को फिर से सूची में शामिल करना है जिनके नाम गहन पुनरीक्षण के दौरान छूट गए थे या हटा दिए गए थे। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले और ”युवा मतदाताओं” का पंजीकरण भी किया जाएगा।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ बृहस्पतिवार को हुई ऑनलाइन बैठक के बाद जारी आधिकारिक सूचना में ये निर्देश दिए गए। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम इसलिए नहीं हटाया जाना चाहिए क्योंकि एसआईआर के दौरान उनकी गणना नहीं हो पाई थी। बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देश दिया गया है कि वे मौजूदा मतदाता सूचियों का एसआईआर से पहले की सूचियों के साथ मिलान कर उन मतदाताओं की पहचान करें जिनके नाम पहले मौजूद थे लेकिन अंतिम सूची से हटा दिए गए।
एक महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया
बीएलओ सभी चिह्नित छूटे हुए लोगों का घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। प्रत्येक अधिकारी को हर सप्ताह 20 से 25 मतदाताओं की जांच करने और इस सत्यापन अभियान को एक महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बीएलओ नए पात्र युवा मतदाताओं और वास्तविक रूप से छूटे हुए मतदाताओं से मौके पर ही फॉर्म-6 के आवेदन प्राप्त करेंगे। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बाद में इन सूचियों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ स्तर एजेंट (बीएलए) के साथ साझा किया जाएगा।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि एसआईआर कराने के नाम पर निर्वाचन आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर काम कर रहा है और पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित कर रहा है। निर्वाचन आयोग और उसके राज्य अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची में 10.2 प्रतिशत की कमी आई है जिसमें 60 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विशेष अभियान चलाने का निर्णय ऐसे समय में भी आया है जब एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, आयोग ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।


